कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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शब्दानुक्रमणिका ८२७
| राष्ट्र ९१ ९९ १५७ | वनदुर्ग ८५ | वास्तुविक्रय २८९ |
| राष्ट्रपाल ४०७ ४२० | वनपाल ४२१ | विकल्प ६३२ ७६५ |
| रूपदर्शक ४१६ | वनविचय ६५२ | विकृति ५४४ |
| रूपाजीवी ६७ ३४० | वप्र ८६ | विक्रमबल ४४८ |
| ४०२ ४१४ ५४१ | वयस ७० | विक्रमाधिकार ५३९ |
| रूप्यमाषक १७४ | वर्णक १४४ | विग्रह ४५३ ४५८ |
| ल | वर्तमान १०१ | विचिति १० |
| लक्षण १५० | वर्तिनी १८७ | विजय ६६३ |
| लक्षणाध्यक्ष १४० | वर्धक ६३७ | विजयच्छन्द १२६ |
| लक्ष्मलम्भाधिकार ५३९ | वलय ६६३ | विजिगीषु ४४६ ५२० |
| लघूत्थान ४९६ | वलीवर्द ७९ | विडूरथ ६७ |
| लम्भ ७३१ | वल्कवर्ग १६८ | वितस्ति १८० |
| लव १८१ | वल्लीवर्ग १६७ | विद्या ८ |
| लाभ ६०९ | वश्य ४९६ ४९७ | विद्यावान् ४२२ |
| लाभसम्पत् ६०९ | वस्त्र ४१४ | विधान ७६५ |
| लिंग ७० | वह १७८ | विनष्ट २१६ |
| लिक्षा १८० | वाक्पारुष्य ३३१ ५६७ | विपरीत ५९१ |
| लिच्छिविक ६६९ | वाक्यकर्मानुयोग ३७६ | विपर्यय ७६५ |
| लिपि १४ | वाक्यशेष ७६५ | विमानित ५८१ |
| लुब्ध ४७३ | वागुरिक ७७ | विरक्त ४७३ |
| लुब्धक ७२ | वाग्जीवन ३३ ५९ | विवाहधर्म २६१ |
| लुब्धवर्ग ४१ ४२ | ८१ ५४० | विवाहपदनिबन्ध २५५ |
| लुब्धकव्यंजना ६९४ | वाजिन् ६५२ | विवीत २९६ ३९१ |
| लेखक ११९ ३८३ | वातव्यधि २१ ५४ | विवीतपथ ९१ |
| ४२१ | ४५३ ५६० ५७० | विवीताध्यक्ष २३९ |
| लोकायत ८ | वादक ३३ ८१ ५४० | विशालविजय ६६३ |
| लोभविजयी ६८० | वानप्रस्थ ११ | विशालाक्ष २० ४४ |
| व | वापी ८८ | ५३ ५५६ |
| वज्र ४१३ | वामन ३३ ६९ | विशिखा १५० |
| वज्रधरण १७५ | वारिपथ ५१३ | विष १६८ |
| वणिक् पथ ७९ ९९ | वारिस्थल ७९ | विषवर्ग १६८ |
| ५१३ | वार्ता ८ १३ ६७० | विषमव्यूह ६४९ ६५६ |
| वत्स ५४ | वास ६५२ | विषमसन्धि ४८५ ४९३ |
| वत्सस्थान ५४ | वासगृह ६५ | विषमा ६४९ |
| वन ७९ ९९ | वास्तु २८६ |