काव्यमीमांसा (महाकवि राजशेखर - कवि-रहस्य एवं देश-विभाग सटीक)
Kavyamimamsa of Rajasekhara with Hindi Commentary
महाकवि राजशेखर / पं. केदारनाथ शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७९ श्लोकः पृष्ठम् श्लोकः पृष्ठम् तङ्गण ९४ पूर्वदेश ९३, ९७ तापी ९४ पृथूदक ९४ ताम्रपर्ण ९२ प्रयाग ९४ ताम्रपर्णी १९, ४५, ८०, ९४ प्राग्ज्योतिष ९३ ताम्रलिप्तक ९३ प्लक्षद्वीपः ९० तुङ्गभद्रा ९४ बर्बर ९४ तुरुष्क ९४ बाहुवेय ८ तुषार ९४ बाहीक ८ तुषारगिरि ५, १० बिन्दुसर ९२ तोसल ९३ बृहद्गृह ९३ त्रवण ३४, ९४ ब्रह्म ८ दक्षिणदेश ९७ ब्रह्मशिला ९४ दक्षिणापथ ९३ ब्रह्मोत्तर ९३ दण्डक ९३ ब्राह्मणवाह ९४ दर्दुर ९३ भादानक ५१ दशपुर ७१, ८६ भारतवर्ष ९२ दशेरक ९४ भृगुकच्छ ९, ९४ देवसभ ९४ भैमरथी ९४ देविका ९४ मगध ३३, ५०, ९३ द्रमिल ३९ मञ्जर ९, ९४ द्रविड ३४ मध्यदेश ५१, ९४ द्रोणाचल ८७ मरु ५१ नर्मदा ६८, ९४ मलद ९३ नागद्वीप ९२ मलय ३९, ४५, ७७, ८१, ९२, ९३, १०० नासिक्य ९३ मल्लवर्तक ९ निषध ९२ महाराष्ट्र ९, ९३ नीलगिरिः ९२ मही ९४ नेपाल ३९, ९३ महेन्द्र ९२, ९३ पयोष्णी ९४ महोदय ८, ९४ पल्लव ९३ मालव ५ पश्चाद्देश ९४ माल्यशिखर ९४ पाञ्चाल ८, ९, ३४ माहिषक ९३ पाटलिपुत्र ५५ माहिष्मती ९३ पाण्ड्य ९३ मुद्गर ९३ पारियात्र ५१, ९२ मुरल ९३ पाल ९, ९३ मेकल ९, ९३ पुण्ड्र ८, ९३ मेरु ८५, ९१, ९२ पुष्करद्वीपः ९० यमुना ८५, ९४