भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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XII KĀVYAPRAKĀŚA १९७ अलमतिचपलत्वात् धर्मकीर्त्तिः; क० व० स० ; बि० का० 58; गो० का० प्र० P. 280; शा० प० No. 566; सु० र० भा० 252/44. ५० अलसशिरोमणि धुत्ताणं हा० गा० स० 970; श्री० का० प० 41; गो० का० प्र० P. 102; गो० का० प्र० P. 102. ९३ अलं स्थित्वा स्मशाने म० भा० शा० आ प० Ch. 153, Sl.11 ; गो० का० प्र० P. 121. ४२७ अलौकिकमहालोकः गो० का० प्र० P. 331. १४८ अवन्ध्यकोपस्य भा० कि० अ० I. 33; गो० का० प्र० P. 175; सु० र० भा० 152/40. ४३० अवाप्तः प्रागल्भ्यं गो० का० प्र० P. 332; सु० र० भा० 304/158. ३९५ अवितथमनोरथपथ गो० का० प्र० P. 312. ५२६ अविरलकमलविलासः रु० का० अ० VII. 83; श्री० का० प० P. 293; गो० का० प्र० P. 372; सु० र० भा० 331/13. १२० अविरलकरवाल गो० का० प्र० P. 127; वि० सा० द० X. 94; सु० र० भा० 104/94. २७० अष्टाङ्गयोगपरिशीलन गो० का० प्र० P. 240. ४०२ असितभुजंगभीषणा गो० का० प्र० P. 347. ४६३ असिमात्रसहायस्य गो० का० प्र० P. 347. ४६४ असिमात्रसहायोऽपि गो० का० प्र० P. 347. १२२ असोढ़ा तत्कालोल्लसद गो० का० प्र० P. 137; सु० र० भा० 5/50; अ० कु० का० 60. १९० असौ मरुच्चुम्बित म० व्य० वि० P. 206; ह० ना० VI. 4;. वे० प० वे० 5; गो० का० प्र० P. 196; सु० र० भा० 331/51. ३५९ अस्त्रज्वालावलीढप्रति भ० वे० सं० III. 7; गो० का० प्र० P. 236; सु० र० भा० 361/50. २८६ अस्याः कर्णवतंसेन वा० का० अ० सू० वृ० II. 2. 14; गो० का० प्र० P. 249.