भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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XIV KĀVYAPRAKĀŚA ४४५ आदाय वारि परितः Cited by Kṣemendra in his औचित्यविचारचर्चा as belong- ing to भट्टेन्दुराज; गो० क० प्र० P. 339; सु० र० भा० 216/17. २०० आदावञ्जनपुञ्जलिप्त गो० का० प्र० P. 201; सु० र० भा० 291/93. ९५ आदित्योऽयं स्थितो म० भा०, शा० प० ch. Sl 19; गो० का० प्र० P. 121. ५४० आनन्दममन्दमिमं . रु० का० अ० IX. 47; गो० का० प्र० P. 378; सु० र० भा० 278/23. १६२ आनन्दसिन्धुरति गो० का० प्र० P. 183. ४२६ आलानं जयकुञ्जरस्य भट्टश्यामलः; म० व्य० वि० P. 350; श्री० का० प० 234; गो० का० प्र० P. 330; सु० र० भा० 109/211. १५४ आलिङ्गितस्तत्रभवान् श्री० का० प० 84; गो० का० प्र० P. 179. ३२३ आलोक्य कोमलकपोल गो० का० प्र० P. 263. ५०० आसीदञ्जनमत्रेति श्री० का० प० 277; गो० का० प्र० P. 360. ६७३ आहूतेषु विहङ्गमेषु भ० श० 69; गो०का० प्र० P. 402; भ० श० 69; सु० र० भा० 180/1053. २२२ इदमनुचितमक्रमञ्च गो० का० प्र० P. 212; भ० शृं० श० 27; सु० र०भा० 205/7 २६४ इदं ते केनोक्तं कथय गो० का० प्र० P. 238. ४१९ इन्दुः किं क्व कलंकः रु० अ० स० P. 30; गो० का० प्र० P. 326; सु० र० भा० 312/22. ४६५ इयं सुनयना दासीकृत उ० का० अ० सा० सं०; श्री० का० प० 255; गो० का० प्र० P. 347; सु० र० भा० 262/168. ८ उअ णिच्चलणिप्पन्दा हा० गा० स० I. 4; श्री० का० प० 9; गो० का० प्र० P. 19.