भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 572, कुल 616 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 572

APPENDIX B XV १८७ उत्कम्पिनी भयपरि मा० ता० व० II. 16; गो० का० प्र० P. 104; ह० र० आ० ?; आध्वआ P. 131; ४२ उत्कृत्योत्कृत्य कृंत्ति भ० मा० मा० V. 16; श्री० का० प० 28; गो० का० प्र० P. 83; सु० र० भा० 366/7 ३०४ उत्तानोच्छूनमण्डूक श्री० का० प० 155; गो० का० प्र० P. 256; सु० र० भा० 371/119. १४७ उत्फुल्लकमलकेसर ह० ना० आ० I. 14; गो० का० प्र० P. 175. ५२ उत्सिक्तस्य तपः परा भ० म० वी० च० II. 16; गो० का प्र० P. 95. ४३६ उदयति विततोर्ध्वरश्मि मां० शि० व० IV. 20; गो० का० प्र० P. 336; सु० र० भा० 327/5. ४३३ उदयमयते दिङ्मालिन्यं श्री० का० प० 237; गो० का० प्र० P. 334; सु० र० भा० 327/18. २४४ उदेति सविता ताम्र श्री० का० प० 123; गो० का० प्र० P. 227. १७ उद्देशोऽयं सरसकदली कु० व० जी० I. 93; गो० का० प्र० P. 52 ५९९ उद्यौ दीर्घिकागर्भात् श्री० का० प० 340; गो० का० प्र० P. 401. ४३८ उन्नतं पदमवाप्य यो लघुः श्री० का० प० 242; गो० का० प्र० P. 336; सु० र० भा० 59/214. ११४ उनिद्रकोकनदरेणु कु० व० जी० II. 3; शा० प० 3736; गो० का० प्र० P. 134; सु० र० भा० 327/8 ४१६ उन्मेषं यो मम न सहते गो० का० प्र० P. 323; सु० र० भा० 313/60 २४ उपकृतं बहु तत्र अ० ध्व० आ० लो० P. 56; श्री० का० प० 8; गो० का० प्र० P. 58. २६५ उपपरिसरं गोदावर्याः गो० का० प्र० P. 239.

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक) · पृष्ठ 572, कुल 616 में से · BharatKosha