भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 573, कुल 616 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 573

XVI KĀVYAPRAKĀŚA २१४ उर्व्यसावत्र तर्वाली रु० का० श्र० II. 10; श्री० का० प० 324; गो० का० प्र० P. 208. ५४ उल्लास्य कालकरवाल शि० क० श्र० I. 24; गो० का० त्र० P. 98; सु० र० भा० 133/10. ४७१ ए एहि किंपि कीएवि हा० गा० स० VII. 2; श्री० का० प० 260; गो० का० प्र० P. 349. ५५४ ए एहि दाव सुन्दरि हा०गा०स० 972; गो०का०प्र० P. 383. ४७७ एकत्रित्रा वससि चेतसि सु० र० को No. 1438; श्रीं० का० प० 264; गो० का प्र० P. 352; सु० र० भा० 105/136. ५१ एकस्मिन् शयने अ० श० 22; गो० का० प्र० P. 95. ४४१ एतत्तस्य मुखात्कियत् गो० का० प्र० P. 338; सु० र० भा० 358/65; भ० श० 94; रु० श्र० स० P. 61. १४२ एतन्मन्दविपक्व वल्लनस्य; श्रीधर० स० क० II. 376; गो० का० प्र० P. 172. ११ एद्दहमेत्तत्थणिआ हां० गा० स० 973; भो० स० क० आ० P. 166; गो० का० प्र० P. 46. २३४ एषोऽहमद्रितनयामुख उषाहरणम्; गो० का० प्र० P. 121. ३३९ एहि गच्छ पतत्तिष्ठ अ० ध्व० आ० लो० III. 44; गो० का० प्र० P. 272; सु० र० भा० 65/5. १४ ओण्णिहं दोब्बल्लं हा० गा० स० 956; गो० का०प्र० P. 49 ७० ओल्लोल्लकरअरअण हा० गा० स० 971; गो०का०प्र० P.108. ३३० औत्सुक्येन कृतत्वरा ह० र० आ० I. 2; गो० का०प्र० P.263; सु० र० भा० 12/26. २२४ कः कः कुत्र न घुर्घरायित गो० का० प्र० P. 213; सु० र० भा० 231/48. ४५ कण्ठकोणविनिविष्टमीश उत्पलः; गो० का० प्र० P. 91; श्री० का० प० 31. १३४ कथमवनिप दर्पो गो० का० प्र० P. 160; सु० र० भा० 136/36.