भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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१५४ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम तायां सिद्धयन्त्यामन्योन्याभावात्मताऽपि स्यादिति व्यर्थो विशेषणप्रयासो हास्यायेति, सविशेषणोऽप्यविशेषणवत्प्रसङ्ग इति महत् कौतुकम्। ननु 'घटाभावो न भवति स्तम्भः' इत्युक्ते किं स्तम्भो घटात्मा विहितो भवति, तत्कस्य हेतोः ? तदा हि तथा स्यात्, यदि घटस्तदभावश्चेत्येव जगत् स्यात्। यदा तु स्तम्भादिरप्यपरा कोटिरस्ति, तदा कथं तथा स्यादित्युक्त- प्रसङ्गानवकाश इति। मैवम्; यथा घटतदभावाभ्यामन्या वस्त्रादिकमप्यस्ति कोटिस्तथाऽन्योन्य- तदभावाभ्यां नान्या कोटिः सम्भवति, निर्विशेषणान्योन्यमध्ये जगत एव प्रवेशात्। तदात्मनोऽपि निषिध्यमानत्वे तन्निषेधात्मके तदात्मनि जगत्प्रवेशात्। न हि 'घटः पटात्मे'त्यनेन पटस्वरूपादन्यस्तदात्मा विहितः स्यात्। से व्यवच्छेद के लिए लक्षण में 'अन्योन्याप्रतियोगित्व' विशेषण देने का प्रयास व्यर्थ, अतएव हास्यास्पद होगा। अति-आश्चर्य तो यह है कि विशेषण देने पर भी विशेषणरहित के तुल्य दोष होता है। शंका—'स्तम्भ घटाभाव नहीं है' यह कहने पर क्या स्तम्भ घटरूप सिद्ध होता है ? ऐसा तब होता, यदि जगत् घट तथा घटाभावमात्र होता। जब कि स्तम्भ आदि और भी कोटियाँ (वस्तुएँ) हैं, तब ऐसा कैसे हो सकता है ? इसी तरह अन्योन्याभाव का निषेध होने पर जगत् अन्योन्यरूप कैसे होगा ? उत्तर—जैसे घट और घटाभाव से अन्य स्तम्भादि हैं, वैसे अन्योन्य और अन्योन्याभाव से अन्य कोई वस्तु नहीं है। अतः संसर्गाभाव के विशेषणरहित अन्योन्य में अन्तर्भूत होने से उक्त दोष वैसे ही है। समर्थन—'अन्योन्याभाव'-शब्द तादात्म्यप्रतियोगिक अभाव की संज्ञा है, 'अन्योन्यस्य अभावः' इस अर्थ में यौगिक नहीं। एवञ्च अन्योन्याभाव के निषेध का अन्योन्य में पर्यवसान न होने से पूर्वोक्त दोष नहीं होगा। खण्डन—यदि तादात्म्य के निषेध को अन्योन्याभाव कहें, तो तादात्म्य के निषेध का निषेध भी तादात्म्यरूप में ही पर्यवसित होगा तथा च तदात्मक संसर्गाभाव में जगत् का ही प्रवेश हुआ, क्योंकि 'घटः पटात्मा' यह कहने पर घटरूप से अन्य पटात्मा प्रतीत नहीं होता, किन्तु घटरूप ही पटात्मा प्रतीत होता है

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