भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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पृष्ठ 233

२१६ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [प्रथम नुमानादौ तच्छब्दाप्रयोगमात्रात् साक्षात्कारिणि तच्छब्दप्रयोगः क्रियते, तर्हि शशविषाण-जबगडदशादिशब्दप्रयोगोऽपि सात्कारिणि कर्तव्य एव, अविशेषात् । अथ जबगडदशादिशब्दाः सामान्यतोऽर्थवत्तया न प्रसिद्धाः , क्वचिदप्य- प्रयोगात् । शशविषाणादिशब्दाश्च असद्विषया एवेति सिद्धाः । प्रत्यक्षादिशब्दास्तु सद्विषयवत्तया सामान्यतः सिद्धाः, 'प्रत्यक्षमस्ती'त्यादिप्रयोगदर्शनादित्यस्ति विशेष इति चेत् । मैवम् ; एतेनापि विशेषेण चाक्षुषादिशब्दानामव्यवच्छेदात् तेषामपि सात्कारिमात्रे प्रयोगप्रसङ्गः । सात्कारित्वे सत्यपि श्रावणादौ चाक्षुषादिशब्दानामप्रयोगः , न त्वेवं प्रत्यक्षादिशब्दानामिति विशेष इति चेत् । एवं तर्हि यत्र सात्कारित्वं नास्ति, यह युक्त नहीं है, क्योंकि असाक्षात्कारी अनुमिति में 'प्रत्यक्ष' शब्द का प्रयोग न होने से ही साक्षात्कारी में 'प्रत्यक्ष' शब्द का प्रयोग हो, तो शशविषाण, 'जबगडदश' आदि शब्दों का भी साक्षात्कारी में प्रयोग करना चाहिए । कारण दोनों में कोई विशेष नहीं है । समर्थन—जबगडदश आदि शब्द सामान्यतः अर्थवत्रूप से प्रसिद्ध नहीं हैं; क्योंकि किसी अर्थ में इनका प्रयोग नहीं होता । शशविषाण शब्द आदि तो असत्- विषय है । किन्तु 'प्रत्यक्ष' आदि शब्द सद्विषयत्वरूप से सामान्यतः सिद्ध हैं, कारण 'प्रत्यक्षमस्ति' यह प्रयोग देखने में आता है । यही दोनों में विशेष है । अर्थात् सद्वविषय और अर्थवत् होकर अनुमिति आदि में अप्रयुक्त होने से ही प्रत्यक्षशब्द का साक्षात्कारी में प्रयोग होना सिद्ध करेंगे । जबगडदश आदि शब्द ऐसे नहीं हैं, अतः उनका साक्षात्कारी में प्रयोग नहीं होता । खण्डन—ऐसा विशेष होने पर भी चाक्षुषादि शब्दों का व्यवच्छेद न हो सकेगा, अर्थात् उनका साक्षात्कारीमात्र में प्रयोग होने लगेगा । कारण, चाक्षुषादि शब्द अर्थवत् और सद्विषय होकर अनुमिति आदि में अप्रयुक्त ही हैं । यदि कहें कि साक्षात्कारी होने पर भी 'श्रावण' आदि में 'चाक्षुष' शब्द का प्रयोग नहीं होता, पर 'प्रत्यक्ष'शब्द का प्रयोग होता ही है । यही प्रत्यक्ष और चाक्षुष शब्द में भेद है । अर्थात् प्रत्यक्ष शब्द अर्थवत, सद्विषय तथा साक्षात्कारीमात्र में प्रयुक्त होकर अनुमिति आदि में प्रयुक्त नहीं होता, अतः वह साक्षात्कारीमात्र का वाचक है । तब