खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
पृष्ठ 254, कुल 610 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] अग्रिम प्रत्यक्ष-लक्षण का खंडन २३७ लिङ्गादिधीजन्यत्वमनुमितित्वादौ प्रयोजकमिति चेत् ; साक्षात्त्वेऽपि तर्हीन्द्रिय- सन्निकर्षादिजन्यत्वमिति साक्षादपि सा न स्यात् । व्यञ्जकोपाधिनियता च जातिरिष्यते । न च तदत्र; उक्तप्रकारबाधात् । न च व्यञ्जकनियमानभ्युपगत्या न तद्गतोपगम्यमिति वाच्यम्; 'किं मया दृष्टं तथा किं वा केन चित्कथितमि'ति संशयानुपपत्तेः। प्राग्भूतायां स्मर्यमाणायां तद्बुद्धौ त्वन्मते मनसा ज्ञानरूपया प्रत्यासत्त्या प्रत्यक्षीक्रियमाणायां साक्षात्त्वाग्रहो विना व्यञ्जकाभावं कथं स्यात् । अर्थधर्मश्च साक्षात्त्वमिति स्वप्रकाशवादे निरस्तम् । समर्थन—लिङ्गज्ञत्व अनुमितित्व का प्रयोजक है । ईश्वरीय ज्ञान नित्य होने से वह अनुमिति नहीं हो सकता । खंडन—यदि ऐसा ही है, तो इन्द्रियसन्निकर्षजत्व भी प्रत्यक्षत्व का प्रयोजक है । उसके न होने से ईश्वरीय ज्ञान प्रत्यक्ष भी न कहलायेगा । ईश्वरीय ज्ञान को सभी आचार्य अपरोक्ष मानते हैं। अतः 'ईश्वरीय ज्ञान अपरोक्ष नहीं है' इसे आप इष्टापत्ति भी नहीं कह सकते । किञ्च—जाति व्यञ्जक धर्म से नियत ही हुआ करती है । उपर्युक्त इन्द्रियार्थसन्नि- कर्षोत्पन्नज्ञानत्व आदि व्यञ्जकों के खण्डित हो जाने से प्रत्यक्षत्व का कोई व्यञ्जक ही नहीं है । इसलिए भी प्रत्यक्षत्व जाति नहीं है । समर्थन—'जाति व्यञ्जक उपाधि से नियत ही होती है' इस नियम को हम नहीं मानते । खंडन—इस नियम को न मानें, तो 'क्या मैंने उसे देखा था या किसीने सुनाया था' इस प्रकार दृष्ट पदार्थ के विषय में कभी-कभी जो सन्देह हो जाता है, वह नहीं होगा । कारण, प्राग्काल में ज्ञात उक्त बुद्धि का स्मरण होने या तुम्हारे मत में ज्ञानलक्षणा प्रत्यासत्ति से प्रत्यक्ष होने पर उसमें प्रत्यक्षत्व जाति का अनिश्चय ( सन्देह ) हो ही नहीं सकता । जो जाति को व्यञ्जक उपाधि से नियत मानते हैं, उनके मतमें व्यक्ति का ग्रहण होने पर भी व्यञ्जक के अनिश्चय से जाति का कदाचित् अनिश्चय हो भी सकता है । 'साक्षात्त्व ज्ञात का नहीं, किन्तु ज्ञेय का धर्म है और तद्विषयक होने से ही ज्ञान में साक्षात्त्व-व्यवहार होता है' इसका खण्डन तो स्वप्रकाश ( कर्मलक्षण के खण्डन ) के प्रस्ताव में कर ही चुके हैं ।