खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] शब्द-लक्षण का खण्डन ३०१ किञ्च—वर्णा इति बहुत्वस्य विवक्षितत्वे 'अहम्' इत्यादेरपदत्वप्रसङ्गः । अविव- क्षितत्वे 'देवदत्त' इत्यन्ताकारस्य पदत्वापातः, तस्य विभक्त्यन्तत्वात् । सार्थकस्तथेति चेत्; 'भवति'त्यादौ शवकारादीनां पदत्वप्रसङ्गः, शपः सार्थक- त्वात् । यत्र विहिता विभक्तिस्तदिति चेन्न । शवकारं परित्यज्य पदत्वप्रसङ्गात् । तन्मध्यपतितत्वाच्छबकारोऽपि गृह्यत इति चेत्; तर्हि यत्र विभक्तिर्विधीयते तत्र तद्विभक्तिमध्यपतितं पदमिति वा विवक्षितम्, यत्र विभक्तिर्विधीयते तत्तद्विभक्तिमध्यवर्तिसहितं पदमिति वा ? आद्ये शवकारस्यापि पृथगेव पदत्व- प्रसङ्गः, लक्षणस्य चाव्यापकत्वात् । द्वितीये 'देवदत्तः' इत्यस्यापदत्वप्रसङ्गः , मध्यवर्तिनोऽभावेन मध्यवर्तिसहितविशेषणाभावात् । क्वचिन्मध्यवर्तिसहितस्य क्वचित्केवलस्येति यथासम्भव इति चेन्न । एकानु- गतरूपानभिधाने लक्षणस्याव्यापकतापत्तेर्दुर्निवारत्वात् । किञ्च—'वर्णाः' यहाँ यदि अच् सहित हलों के बहुत्व की विवक्षा करें, तो 'अहम्' इत्यादि पद न कहलायेगा । यदि बहुत्व की विवक्षा न करें, तो 'देवदत्तः' यहाँ 'अः' भी विभक्त्यन्त होने से पद कहा जायगा । समर्थन—'सार्थक विभक्त्यन्त' पद है, अतः 'देवदत्तः' इसका घटक 'अः' पद हो जायगा । खंडन—ऐसा कहने पर 'भवति' का घटक 'अति' भी पद हो जायगा । कारण शप्-प्रत्यय होने से वह सार्थक भी है । समर्थन—'जिससे विभक्ति विहित हो, [ सार्थक विभक्त्यन्त ] वह पद है।' शप् से विभक्ति विहित न होने से वह विभक्त्यन्त पद नहीं होगा । खण्डन—शप् के अकार को त्यागकर 'भूति' एतावन्मात्र पद हो जायगा। लोक में तन्मात्र में पदत्व प्रसिद्ध नहीं है, अतः इष्टापत्ति नहीं कह सकते । समर्थन—'प्रकृति-प्रत्यय के मध्य होने से शप्-विशिष्ट ही पद है।' खंडन—इसमें जहाँ-जहाँ विभक्ति का विधान हो, वहाँ तन्मध्यपतित पद है, यह अर्थ विवक्षित है अथवा जिससे विभक्ति का विधान हो, तन्मध्यपतितयुक्त पद है, यह अर्थ विवक्षित है ? प्रथम पक्ष में शप् का अकार पृथक् ही पद हो जायगा । किञ्च--'भवति' आदि में लक्षण की अव्याप्ति हो जायगी । द्वितीय पक्ष में 'देवदत्तः' यह पद न कहलायेगा, कारण मध्यवर्ती का अभाव होने से वह तद्विशिष्ट नहीं है । समर्थन—'कहीं-कहीं जिससे विभक्ति विहित हो, मध्यवर्तिसहित विभक्त्यन्त वह पद है' तथा 'कहीं-कहीं जिससे विभक्ति विहित हो, केवल वह विभक्त्यन्त ही पद है।'