खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१४ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ तृतीय गौणोऽयं प्रमाणशब्द इति चेन्न । प्रमाणत्वयोगिनि यद्ययं प्रमाणशब्द- प्रयोगस्तदा गौणत्वव्याघातो मुख्यत्वात् । अथ प्रमाणाभासे, तदा अलं तदुद्भावनया । ईश्वरसद्भावे यः प्रमाणाभासः कुत्सित इत्यत्र परस्यापि सम्प्रतिपन्नत्वात् । ईश्वरसद्भाव इति च विशेषोपादानं व्यर्थं स्यात्, अन्यत्रापि हि विषये प्रमाणाभासः कुत्सित एव, साध्यासाधकत्वात् । नापि तृतीयः ; तथा सति हि वितर्कस्य पक्षान्तरसापेक्षत्वेन पक्षान्तरमपि वचनीयं भवति—ईश्वरसद्भावे किमेतत् प्रमाणमुत अन्यदिति । तच्च भवता नाभ्यधायि, ततो न्यूनत्वं दोषः । नापि चतुर्थः; प्रश्नार्थात् खलु किंशब्दात्कस्यचित् पदार्थस्य जिज्ञास्यमानता प्रतीयते । सा चेह प्रमाणपदसमभिव्याहारात् प्रमाणविषयिणी प्रतीयते । यद्विषयश्च प्रश्नस्तदुत्तरवादिनाऽभिधेयम् । तदयं प्रश्न ईश्वरसद्भावे प्रमाण- सामान्यविषयस्तद्विशेषविषयो वाऽभिप्रेतः ? आद्यश्चेत् ; ईश्वरसद्भावे प्रमाणमित्ये- समर्थन—यहाँ 'प्रमाण' शब्द गौण है । खंडन—यदि प्रमाण में 'प्रमाण' शब्द का प्रयोग हो, तो उसे गौण कहना व्याहत है, क्योंकि वह मुख्य ही हुआ। यदि प्रमाणा- भास में 'प्रमाण' शब्द का प्रयोग है, तो उसमें कुत्सितत्व का उद्भावन व्यर्थ है, कारण ईश्वर में जो प्रमाणाभास है वह कुत्सित है, यह प्रतिवादी भी मानता है । किञ्च—'ईश्वरसद्भाव'रूप विषय-विशेष का कथन व्यर्थ हो जायगा, कारण अन्य विषयों में भी साध्य का असाधक होने से प्रमाणाभास कुत्सित है ही । इसीलिए तृतीय पक्ष भी युक्त नहीं है, कारण वितर्क अन्य पक्ष में सापेक्ष होने से उसे भी कहना चाहिए । अर्थात् 'ईश्वर-सद्भाव में यह प्रमाण है या यह ?' ऐसा कहना चाहिए । किन्तु आपने वैसा नहीं कहा, अतः न्यूनत्व दोष हो जायगा । चतुर्थ पक्ष भी युक्त नहीं, कारण प्रश्नार्थक किम्-शब्द से किसी पदार्थ की जिज्ञासा प्रतीत होती है । प्रकृत में प्रमाण पद का सन्निधान होने से वह जिज्ञासा प्रमाणविषयक प्रतीत होती है । साथ ही जिस विषय में प्रश्न हो, उत्तरवादी को उसी- को कहना चाहिए। ऐसी स्थिति में यह पूछा जा सकता है कि क्या ईश्वर-सद्भाव में यह जो प्रश्न है, वह प्रमाणसामान्यविषयक है या प्रमाण-विशेषविषयक ? यदि प्रथम पक्ष है, तो 'ईश्वरसद्भावे प्रमाणम्' यही उत्तर ठीक है, कारण जिस विषय में