भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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५१८ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ चतुर्थ द्रव्यसामग्र्या वृक्षसामग्र्या शिंशपासामग्र्या च पृथग्व्यक्तिजननापत्तेः, पृथगेव तासां सामग्रीत्वात् । सर्वासाम्च व्यक्तिं प्रत्येव जनकत्वात्, द्रव्यत्वा- दीनामजन्यत्वात् । शिंशपासामग्र्या वृक्षसामग्रीसहिताया एव सामग्रीभावान्न पृथक् शिंशपा- व्यक्तिरिति चेन्न । वृक्षसामग्र्याः शिंशपासामग्रीमतीत्यापि शालतमालादेर्वृक्षस्य जननात् पृथक्तया वृक्षव्यक्तिजननापत्तेः । साऽपि शिंशपासामग्री तन्मिलिता जनिकेति न व्यक्तिभेद इति चेन्न । शिंशपार्थातिरिक्तवृक्षार्थाभावापत्तेः । वृक्षशिंशपासामग्र्योरेकीभूयोर्जननाविशेषाद् वृक्षसामग्री च वृक्षजनन एव कथं क्वचिच्छिंशपासामग्री क्वचित्तमालसामग्रीमपेक्षत इति स्यात् । किञ्च—‘द्रव्यं वृक्षः शिंशपा च’ यह सामानाधिकरण्य प्रतीति अनुपपन्न हो जायगी; क्योंकि वृक्ष की सामग्री, द्रव्य की सामग्री और शिंशपा की सामग्री से भिन्न-भिन्न कार्य उत्पन्न नहीं होते । किन्तु वे होने चाहिए, कारण इनमें प्रत्येक में सामग्रीत्व रहता है । फिर द्रव्यत्वादि सामान्य अजन्य होने से ये तीनों सामग्रियाँ व्यक्ति की ही जनिका हैं । समर्थन — वृक्ष-सामग्री से युक्त ही शिंशपा-सामग्री में सामग्रीत्व है। अतः वृक्ष से पृथक् शिंशपा-व्यक्ति की उत्पत्ति नहीं होती, किन्तु वृक्षरूप शिंशपा की ही उत्पत्ति होती है । खंडन— ऐसा मानने पर वृक्ष से पृथक् शिंशपा की उत्पत्ति न हो, किन्तु वृक्ष-सामग्री तो शिंशपा-सामग्री की अपेक्षा करती ही नहीं। यदि वृक्ष-सामग्री भी शिंशपा-सामग्री की अपेक्षा करे, तो वृक्ष-सामग्री से ताल-तमाल की उत्पत्ति भी न होनी चाहिए । अतः शिंशपा-स्थल में शिंशपा से पृथक् वृक्ष की उत्पत्ति क्यों न हो ? समर्थन—वृक्ष-सामग्री भी शिंशपा-स्थल में शिंशपा-सामग्री से युक्त ही कार्य का जनन करती है । अतः शिंशपा से पृथक् वृक्ष की उत्पत्ति, नहीं होती । खंडन—यदि ऐसा मानें, तो शिंशपास्थल में शिंशपा से भिन्न ‘वृक्ष’ शब्द के अर्थ का अभाव हो जायगा । कारण सामग्री-भेद से कार्यभेद होता है । शिंशपास्थल में वृक्ष-सामग्री, शिंशपा-सामग्री दोनों एक होकर कार्यजनक हैं । फिर कार्यभेद कैसे होगा ? किंच—वृक्ष-सामग्री से वृक्ष की ही उत्पत्ति होती है, अन्य की नहीं । फिर वृक्ष की उत्पत्ति में ही उक्त सामग्री शिंशपा-सामग्री की और कहीं तालादि-सामग्री की अपेक्षा