किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
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और उस पर्वतके मार्गदर्शक एक गुह्यकको वहाँ उपस्थित कर व्यासजी अन्तर्हित हो गये ।
प्रस्थानकालमें अश्रुओंका संवरण कर द्रौपदीने अर्जुनको अनेक उपदेश-वाक्य कहा। अनन्तर पुरोहितसे पहनाये गये शर और कवचसे युक्त होकर अर्जुन इन्द्रकील पर्वतकी ओर प्रस्थान करते हैं ।
चतुर्थ सर्ग—तब यक्षके साथ इन्द्रकील पर्वतकी ओर जाते हुए अर्जुनने शरत् ऋतुकी शोभासे सम्पन्न पृथिवीको देखा । तब यक्ष भी शरत्की सुषमासे युक्त वनभूमिको देखनेमें तत्पर अर्जुनको शरत्की शोभाका वर्णन करने लगा । अर्जुन भी हिमालय पर्वतका अवलोकन करने लगे ।
पञ्चम सर्ग—यक्षके साथ इन्द्रकील पर्वतपर चढ़ते हुए अर्जुन हिमालय पर्वतकी अनेक मनोहर शोभाको देखने लगे । उनको हिमालयदर्शनमें आसक्त देखकर यक्ष भी इन्द्रकील पर्वतका वर्णन करने लगा, अनन्तर यक्ष अर्जुनको आशीर्वाद देकर चला जाता है । कुछ क्षण अर्जुनको उसके वियोगसे खेदका अनुभव हुआ ।
षष्ठ सर्ग—अर्जुन इन्द्रकील पर्वतपर आरोहण करते हैं । तब अनेक सुन्दर वृक्षोंसे परिपूरित इन्द्रकील शैलपर निवास कर अर्जुन कठोर तपस्या करने लगे । उनकी तपस्याके प्रभावसे हिंस्रजन्तु भी हिंसा छोड़कर परस्पर वैरत्याग कर विचरण करने लगे । अर्जुनकी तपस्याके प्रभावसे खिन्न होकर सप्तर्षियोंने इन्द्रके पास जाकर उसका वर्णन किया । तब इन्द्रने अर्जुनकी तपस्याकी परीक्षाके लिए विघ्नकारक अप्सराओं और गन्धर्वोंको वहाँ भेजा ।
सप्तम सर्ग—गन्धर्वोसे संरक्षित अप्सराएँ इन्द्रकी आज्ञाके अनुसार रथ और हाथी आदि यात्राके उपकरणोंके साथ इन्द्रकील पर्वतपर स्थित अर्जुनके पास पहुँच गयीं ।
अष्टम सर्ग—अप्सरा और गन्धर्व आदिके अर्जुनका मनोहरण करनेके लिए अनेक प्रकारके आमोद प्रमोदोंका वर्णन एवम् प्रातःकालका सुहावना वर्णन है।
नवम सर्ग—सन्ध्या और चन्द्रोदयका मनोहर वर्णन । कामकी क्रीड़ा, अप्सराओंके अनेक आमोद-प्रमोदोंका वर्णन तथा प्रातःकालका मनोहर वर्णन ।