किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ ११ ]
अर्जुनको प्रणाम कर प्रशंसापूर्वक कहा कि 'आपको हमारे स्वामी के बाणको इसतरह लेना उचित नहीं। आप उनसे माँगकर ले लें। निकट ही हैं, उनके साथ मैत्री कर लें। आपको सब कुछ अभीष्ट प्राप्त होगा।'
चतुर्दश सर्ग--अर्जुनने वनेचरका उपदेश सुनकर उसके भाषणकी प्रशंसा कर कहा कि 'तुम्हारे स्वामीका बाण कहीं गुम हो गया होगा, उसे ढूंढो। उसके लिए तुम्हे मुझे उलाहना देना उचित नहीं। खाण्डववनके दाहके समय अग्निदेवने मुझे असंख्य बाण दिये हैं। उसके लिए पर्वतीय किरातके बाणमें मेरी आस्था नहीं है। वर्णाश्रमधर्मके रक्षक मेरी आखेट क्रीडा करनेवाले तुम्हारे स्वामी पर्वतीय किरातके साथ मैत्रीका कुछ भी औचित्य नहीं है।' ऐसा कहनेवाले अर्जुन से यह वनेचर तर्जनकर सेनाके पास स्थित प्रसन्नस्वरूप शिवजीके पास गया। तब विशाल किरातसेनाके साथ जिसके अधिपति कार्त्तिकेय थे, राजकुमार अर्जुनका भीषण युद्ध होता है।
पञ्चदश सर्ग--कोपाक्रान्त अर्जुनके बाणप्रहारसे सारी किरातसेना भया-विष्ट होकर भागने लगी। तब अर्जुन उनके सेनापति कार्त्तिकेयसे युद्ध करने लगे। कार्त्तिकेय अपनी सेनाको साहस और धैर्य देनेके लिए समझाने लगे। तब शिवजी और अर्जुनका तुमुल संग्राम होने लगा। शिवजीके प्रचण्ड बाणोंसे विद्ध होकर भी अर्जुनने अपना धैर्य नहीं छोड़ा। इसे देख सब चकित हुए।
षोडश सर्ग - अर्जुन किरातपतिको असामान्य रणकौशल और अपनी शक्तिहीनता देखकर अनेक तर्क-वितर्क करने लगे। तब उन्होंने शिवसेना-पर प्रस्वापनास्त्रका प्रयोग किया। फलस्वरूप शिवसेना मूर्च्छित हो गई। तब शिवजीके ललाट (लिलार) से पीला तेज उत्पन्न हुआ, जिससे किरातसेना पूर्ववत् युद्धके लिए सन्नद्ध हुई। अनन्तर अर्जुनने नागपाशोंका प्रयोग किया। उनके प्रभावसे आकाशचारी पक्षी इधर-उधर भागने लगे। तब शिवजीने नागपाशोंको हटानेके लिए गरुडास्त्रका प्रक्षेप किया, जिससे नागपाश निरस्त हो गये। तब अर्जुनने आग्नेयास्त्रका प्रहार किया जिससे ज्वालामाली अग्निदेवके प्रकट होनेसे सर्वत्र उष्णताका प्रादुर्भाव हुआ। शिवजीने उसे हटानेके लिए वरुणास्त्रका प्रक्षेप किया जिससे मेघमण्डलसे करासम्पातमय वृष्टिसे अग्निका प्रचण्ड तेज दूर हो गया। अर्जुनसे किये गये समस्त दिव्यास्त्रोंका प्रयोग