किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
DevanagariHindipublished707 पृष्ठ
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चतुर्थः सर्गः २९
कोषः— 'उपत्यकाद्रेरासन्ना भूमिरूर्ध्वमधित्यका।' इत्यमरः। 'हलायुषः, नीलाम्बरो रौहिणेयस्तालाङ्को मुसली हलो। संकर्षणः सीरपाणि' इत्यमरः।
हिन्दी— विस्तृत वनपंक्तियों से नीली बनी उपत्यकाओं (पर्वत का निचला भाग) से घिरे हुए, बर्फ की चट्टानों से ढके शुभ्र वर्ण के हिमालय पर्वत पर पहुँचकर अर्जुन ने हाला के राग से युक्त, नील वस्त्र पहने हुए सीरपाणि बलराम की शोभा का स्मरण किया ॥ ३८ ॥
इति भारविकृतौ सुभाटोकासंवलिते किरातार्जुनीये चतुर्थः सर्गः।
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