किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
DevanagariHindipublished707 पृष्ठ
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४२६ | किरातार्जुनीयम्
| ७८, द० ८, २४, ३४, ४२, एका० ३३, ५५, ५९, ६४, द्दा० १७, २०, २२, त्रयो० १४, १५, १७, २२, २८, ५३, ६६, चतुर्द० ७, ३५, ४०, ५२, षो० २६, ६०, सप्तद० ४ पूर्णोपमा, मालोपमा, श्लिष्टोपमा। | ९, द० २७, एका० १९, षो० २१, ४१, ६२, सप्तद० ४६। |
| १२ ऊर्जस्वल - द०५१, ५७। | २४ निरोष्ठ्य - पञ्चद० ७, २१। |
| १३ एकव्यञ्जन - पञ्चद० १४। | २५ परिकर -- प्र० १९, ष० ४०, स० ४, एका० ४५। |
| १४ एकावली -- प्र० १२, द्वि० ३२, द० १३। | २६ परिणाम -- च० २। |
| १५ कारणमाला - द्वि० १४, ४०, सप्तदश १७ | २७ परिवृत्ति - द्वि० १९ संपरिवृत्ति। |
| १६ काव्यलिङ्ग - प्र० ७, द्वि० २९, ३९ ४०, ४४, तृ० ४२, प० २०, २३, २६, ४०, ४४, ष० २८, स० २६, अष्ट० ३, १२, १८, ४४, न० ५५, ५७, ६२, ६३, द० १५, एका० १, ७८; चतुर्द० २९। | २८ पर्याय -- द० ३७। |
| १७ गोमूत्रिका बन्ध - पञ्चद० १२। | २९ पर्यायोक्ति -- प० ४१। |
| १८ छेकानुप्रास - अष्ट० १। | ३० पूर्णोपमा -- प्र० ४६, तृ० ४३। |
| १९ तद्गुण - ष० ८, स० २३, द्दा० २३। | ३१ प्रतिलोम - पञ्चद० २३। |
| २० तुल्ययोगिता - न० ५१, एका० ५४। | ३२ प्रतिलोमानुलोमपाद - पञ्चद० २० |
| २१ दृष्टान्त - द्वि० ५१, पञ्चद० २५। | ३३ प्रेय - प० ५१। |
| २२ द्व्यक्षर - पञ्चद० ३८। | ३४ भाविक - प्र० २९, ३३। |
| २३ निदर्शना - द्वि० ५१, प० ३९, ष० ४, स० ३, १७,४०, ५७, न० | ३५ भ्रान्तिमत् - प० २६, ३१, ४२, ष० ८, स० २२, ३१, अष्ट० ७, द० ४, ४२, अष्टाद० २१। |
| ३६ माला - अष्टाद० ४६। | |
| ३७ मालोपमा - त्रयो० २९, चतुर्द० ६३, सप्तद० ११। | |
| ३८ मीलन - अष्ट० ४६, ४८। | |
| ३९ यथासंख्य - अष्ट०४२, पञ्चद० १६ | |
| ४० यमक - प० १८, २० २३, पञ्चद० १, ३, १६, ३१, शृङ्खला यमक। | |
| ४१ रसवत - द० ५१। | |
| ४२ रूपक - तृ० ४१, च० २४, प० २८, ष० ४१, स० ५, ११, १५, न० ३, २७, ५७, ६२, द० ३२, चतुर्द० १२, पञ्चद० ३८। |