किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
DevanagariHindipublished707 पृष्ठ
पृष्ठ 685, कुल 707 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 685
| अलङ्कारस्थापना | ४२७ |
|---|---|
| ४३ वस्तुध्वनि — त्रयो० २३, २७। | ५८ संसृष्टि — द्वि० ५०, तृ० ४६, च० १७, प० १८, २० २३, सप्त० १२ अष्ट० १, ७, १०, ४६, न० ६३, ६४, द० ३२, पञ्चद० १६, सप्तद० ४६। |
| ४४ वास्तव — च० २२। | ५९ संदेह — च० ५, पं० १२, ३६, ष० १२, अष्ट० १५, ३५, ३६, ५३, न० ७, १५, ९२, ९४। |
| ४५ विभावना — प० २६, अष्ट० ४०, न० २५। | ६० सम — द० २५। |
| ४६ विरोध — द० १४। | ६१ समपरिवृत्ति — स० ३५। |
| ४७ विरोधाभास — न० ६३, ६४, एका० ३५, द्वा० १६, अष्टाद० ४१। | ६२ समासोक्ति — प्र० १८, तृ० ४४, ६०, प० २७, अष्ट० ६, न० ५, ११, द० ३१, चतुर्द० ३। |
| ४८ विशेषोक्ति — तृ० ८। | ६३ समाहित — द० ५१। |
| ४९ विषम — अष्ट० ४१, द० ३८। | ६४ समुच्चय — पञ्चद० १, षो० ३५। |
| ५० वृत्त्यनुप्रास — प्र० १। | ६५ सर्वतोभद्र — पञ्चद० १५। |
| ५१ व्यतिरेक — प० ४४, एका० ६३, द्वा० १४, त्रयो० ५१, ५३। | ६६ सहोक्ति — प्र० ३९, द० ३९, ४८। |
| ५२ शृङ्खला यमक — पञ्चद० ४२। | ६७ सामान्य — अष्ट० ४२। |
| ५३ श्लिष्टोपमा — न० १८। | ६८ स्मरण — च० ३८, प० २४, ष० १२। |
| ५४ श्लेष — अष्ट० २, द० २४, ३४, एका० ५९, त्रयो० १४, १५, चतुर्द ५२, सप्तद० २७। | ६९ स्वभावोक्ति — च० १०, १३, १६ १७, १८, २९, ष० १५, सप्त० १२, १९, अष्ट० १७, १८, २२ २६, ४५, ४९, द्वा० ४२, त्रयो० १८, २२, ३०, ३१, चतुर्द० १६। |
| ५५ संशय — न० ६९। | ७० हेतूत्प्रेक्षा — द्वि० १०, अष्ट २०। |
| ५६ सङ्कर — च० ३४, प० २६, ष० २, ८, ४० ४१, स० २३, २५, अष्ट० ६, ११, १५, १८, ४२; न० ३, ५, १२, १४, २७, ३२, ५५, ५७, ६२, द० २४, २५, ३४, ३६, द्वा० १४, त्रयो० २१, ५३, ६६, चतुर्द० २९, षो० ३५। | |
| ५७ संसर्ग — अष्ट० २। |