किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
DevanagariHindipublished707 पृष्ठ
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४३८ | किरातार्जुनीयम्
| न | स० | श्लो० | स० | श्लो० | |
|---|---|---|---|---|---|
| न ज्ञातं तात यत्तस्य | ११ | ४२ | निद्राविनोदितनितान्त | १ | ७५ |
| न तेन सज्यं क्वचिदु | १ | २१ | निपत्तिनेऽधिनिरोध | १८ | ६ |
| न ददाह मुहुर्वनानि | १२ | १६ | निष्पीयमानस्तबका | ८ | ६ |
| न दलति निचये | १० | ३९ | निबद्धनिश्वासविकम्पिता | ४ | १५ |
| ननु हो मथना राधो | १५ | २० | निमीलदाकेकरलोल | ८ | ५३ |
| न नोननुन्नो नुन्नोनो | १५ | २४ | निरञ्जनं साचिविलोकितं | ८ | ५२ |
| न पपात सन्निहित | १२ | ४ | निरत्ययं साम न दान | १ | १२ |
| न प्रसादमुचितं गमिता | १ | २५ | निरास्पदं प्रशनकुतूहलित्व | ३ | ९ |
| न मृगः खलु कोऽप्ययं | १३ | ६ | निरीक्ष्यमाणा इव | ४ | ३ |
| नयनादिव शूलिनः | १३ | २२ | निरीक्ष्यसंरम्भनिरस्त | ३ | ११ |
| न रागि चेतः परमा | १८ | ५१ | निर्याय विधाय दिनादि | ३ | २५ |
| नवपल्लवाञ्जलिभृतः | ६ | २६ | निवृत्तवृत्तोऽपयोधर | ८ | ७ |
| न वर्त्म कस्मैचिदपि | १४ | १४ | निशम्य सिद्धिं द्विषतां | १ | १७ |
| नवविनिद्रजपाकुसुम | ५ | ८ | निशातरोद्रेषु विकासतां | १४ | ३० |
| नवात्तपालोहितमाहितं | ४ | ८ | निशि तामिरितोऽभीको | १५ | २२ |
| न विरोधिनी रूपमियाय | १२ | ४६ | निःशेषं प्रशमितरेण | ७ | ३८ |
| न विसिस्मिये न विषसाद | १२ | ५ | निःशेषं शकलित | १७ | ६२ |
| न समयपरिरक्षणं | १ | ४५ | निःश्वासधूमैः स्थगितां | १६ | ११ |
| न सुखं प्रार्थये नार्थ | ११ | ६६ | निषण्णमापहप्रतिकार | १४ | ३७ |
| न सजो रुचिर | ९ | ३५ | विषादिसन्नाहमणि | १६ | १२ |
| नानारत्नज्योतिषां | ५ | ३६ | निसर्गदुर्बोधमबोध | १ | ६ |
| नाम्तरङ्गाः श्रियो जातु | ११ | २४ | निहते विडम्बित | १२ | ३८ |
| नाभियोक्तुमनुत | १३ | ५८ | निहितसरसयावकै | १० | ३ |
| नासुरोऽयं न वा नागो | १५ | १२ | नीतोच्छ्रायं मुहुरशिशिर | ५ | ३१ |
| निचायिनि लवली | १० | २९ | नीरन्ध्रं पयिषु रजो | ७ | २५ |
| निजह्निरे तस्य हरेषु | १७ | २६ | नीरन्ध्रं परिगमिते | १७ | ६ |
| निजेन नीतं विजितान्य | १४ | ३९ | नीलनौरजनिभेहिम | ९ | १९ |
| नुनोद तस्य स्थलपद्मिनी | ४ | ५ |