संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished506 पृष्ठ
पृष्ठ 82, कुल 506 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 82
७२ * कूर्मपुराण *
| एकानेकविभागस्था मायातीता सुनिर्मला।<br>महामाहेश्वरी सत्या महादेवी निरञ्जना॥ ७८॥<br>काष्ठा सर्वान्तरस्था च चिच्छक्तिरतिलालसा।<br>नन्दा सर्वात्मिका विद्या ज्योतीरूपामृताक्षरा ॥ ७९ ॥<br>शान्तिः प्रतिष्ठा सर्वेषां निवृत्तिरमृतप्रदा।<br>व्योममूर्तिर्व्योमलया व्योमाधाराऽच्युताऽमरा ॥ ८० ॥<br>अनादिनिधनामोघा कारणात्मा कलाकला।<br>ऋतुः प्रथमजा नाभिरमृतस्यात्मसंश्रया ॥ ८१ ॥<br>प्राणेश्वरप्रिया माता महामहिषघातिनी।<br>प्राणेश्वरी प्राणरूपा प्रधानपुरुषेश्वरी ॥ ८२ ॥<br>सर्वशक्तिकलाकारा ज्योत्स्ना द्यौर्महिमास्पदा।<br>सर्वकार्यनियन्त्री च सर्वभूतेश्वरेश्वरी ॥ ८३ ॥<br>अनादिरव्यक्तगुहा महानन्दा सनातनी।<br>आकाशयोनिर्यौगस्था महायोगेश्वरेश्वरी ॥ ८४ ॥<br>महामाया सुदुष्पूरा मूलप्रकृतिरीश्वरी।<br>संसारयोनिः सकला सर्वशक्तिसमुद्भवा ॥ ८५ ॥<br>संसारपारा दुर्बारा दुर्निरीक्ष्या दुरासदा।<br>प्राणशक्तिः प्राणविद्या योगिनी परमा कला ॥ ८६ ॥<br>महाविभूतिर्दुर्धर्षा मूलप्रकृतिसम्भवा।<br>अनाद्यनन्तविभवा परार्था पुरुषारणिः ॥ ८७ ॥<br>सर्गस्थित्यन्तकरणी सुदुर्वाच्या दुरत्यया।<br>शब्दयोनिः शब्दमयी नादाख्या नादविग्रहा ॥ ८८ ॥<br>प्रधानपुरुषातीता प्रधानपुरुषात्मिका।<br>पुराणी चिन्मयी पुंसामादिः पुरुषरूपिणी ॥ ८९ ॥<br>भूतान्तरात्मा कूटस्था महापुरुषसंज्ञिता।<br>जन्ममृत्युजरातीता सर्वशक्तिसमन्विता ॥ ९० ॥<br>व्यापिनी चानवच्छिन्ना प्रधानानूप्रवेशिनी।<br>क्षेत्रज्ञशक्तिरव्यक्तलक्षणा मलवर्जिता ॥ ९१ ॥<br>अनादिमायासम्भिन्ना त्रितत्त्वा प्रकृतिर्गुहा।<br>महामायासमुत्पन्ना तामसी पौरुषी ध्रुवा ॥ ९२ ॥<br>व्यक्ताव्यक्तात्मिका कृष्णा रक्ता शुक्ला प्रसूतिका।<br>अकार्या कार्यजननी नित्यं प्रसवधर्मिणी ॥ ९३ ॥<br>सर्गप्रलयनिर्मुक्ता सृष्टिस्थित्यन्तधर्मिणी।<br>ब्रह्मगर्भा चतुर्विंशा पद्मनाभाच्युतात्मिका ॥ ९४ ॥<br>वैद्युती शाश्वती योनिर्जगन्मातेश्वरप्रिया।<br>सर्वाधारा महारूपा सर्वैश्वर्यसमन्विता ॥ ९५ ॥ | एका, अनेकविभागस्था (विविध रूपोंमें स्थित), मायातीता, सुनिर्मला, महामाहेश्वरी, सत्या, महादेवी, निरञ्जना, काष्ठा, सर्वान्तरस्था (सभीके हृदयमें स्थित रहनेवाली), चिच्छक्ति (चैतन्यशक्तिरूपा), अतिलालसा (उत्कृष्ट इच्छारूपा), नन्दा, सर्वात्मिका, विद्या, ज्योतीरूपा, अमृताक्षरा, शान्ति, सभीकी प्रतिष्ठा, निवृत्ति, अमृतप्रदा, व्योममूर्ति, व्योमलया, व्योमाधारा, अच्युता, अमरा, अनादिनिधना, अमोघा, कारणात्मिका, कला, अकला, ऋतु, प्रथमजा, अमृतनाभि, आत्मसंश्रया, प्राणेश्वरप्रिया, माता, महामहिषघातिनी, प्राणेश्वरी, प्राणरूपा, प्रधानपुरुषेश्वरी ॥ ७८–८२ ॥<br><br>सर्वशक्तिकलाकारा, ज्योत्स्ना, द्यौः (आकाशरूपा), महिमास्पदा, सर्वकार्यनियन्त्री, सर्वभूतेश्वरेश्वरी, अनादि, अव्यक्तगुहा, महानन्दा, सनातनी, आकाशयोनि, योगस्था, महायोगेश्वरेश्वरी, महामाया, सुदुष्पूरा, मूलप्रकृति, ईश्वरी, संसारयोनि, सकला, सर्वशक्तिसमुद्भवा, संसारपारा, दुर्वारा, दुर्निरीक्ष्या, दुरासदा (कठिन तपसे प्राप्त करने योग्य), प्राणशक्ति, प्राणविद्या, योगिनी, परमा, कला, महाविभूति, दुर्धर्षा, मूलप्रकृतिसम्भवा, अनाद्यनन्तविभवा, परार्था, पुरुषारणि पुरुष (परब्रह्म) ही जिनकी अरणि (अग्निमन्थनका काष्ठ-विशेष है), सर्गस्थित्यन्तकारिणी, सुदुर्वाच्या, दुरत्यया, शब्दयोनि, शब्दमयी, नादाख्या, नाद-विग्रहा, प्रधानपुरुषातीता, प्रधानपुरुषात्मिका, पुराणी, चिन्मयी, पुरुषोंकी आदिरस्वरूपा, पुरुषरूपिणी, भूतान्तरात्मा, कूटस्था, महापुरुषसंज्ञिता, जन्म-मृत्यु-जरातीता, सर्वशक्तिसमन्विता, व्यापिनी, अनवच्छिन्ना, प्रधानानूप्रवेशिनी, क्षेत्रज्ञशक्ति, अव्यक्तलक्षणा, मलवर्जिता, अनादिमायासम्भिन्ना (अनादिमायारूपा), त्रितत्त्वा, प्रकृति, गुहा, महामायासमुत्पन्ना, तामसी, पौरुषी, ध्रुवा ॥ ८३-९२ ॥<br><br>व्यक्ताव्यक्तात्मिका, कृष्णा, रक्ता, शुक्ला, प्रसूतिका, अकार्या, कार्यजननी, नित्यप्रसवधर्मिणी, सर्गप्रलयनिर्मुक्ता, सृष्टिस्थित्यन्तधर्मिणी, ब्रह्मगर्भा, चतुर्विंशा (चौबीस तत्त्वोंमें अन्तिम तत्त्व), पद्मनाभा, अच्युतात्मिका, वैद्युती, शाश्वती, योनि (मूल कारण), जगन्माता, ईश्वरप्रिया, सर्वाधारा, महारूपा, सर्वैश्वर्यसमन्विता ॥ ९३–९५ ॥ |