भारतकोश
संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण

Kurma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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* अध्याय ११ *७५
सर्वेन्द्रियमनोमाता सर्वभूतहृदिस्थिता।<br>संसारतारिणी विद्या ब्रह्मवादिमनोलया ॥ १३१ ॥<br>ब्रह्माणी बृहती ब्राह्मी ब्रह्मभूता भवारणिः।<br>हिरण्मयी महारात्रिः संसारपरिवर्तिका ॥ १३२ ॥<br>सुमालिनी सुरूपा च भाविनी तारिणी प्रभा।<br>उन्मीलनी सर्वसहा सर्वप्रत्ययसाक्षिणी ॥ १३३ ॥<br>सुसौम्या चन्द्रवदना ताण्डवासक्तमानसा।<br>सत्त्वशुद्धिकरी शुद्धिर्मलत्रयविनाशिनी ॥ १३४ ॥<br>जगत्प्रिया जगन्मूर्तिस्त्रिमूर्तिरमृताश्रया।<br>निराश्रया निराहारा निरङ्कुरवनोद्भवा ॥ १३५ ॥<br>चन्द्रहस्ता विचित्राङ्गी स्रग्विणी पद्मधारिणी।<br>परावरविधानज्ञा महापुरुषपूर्वजा ॥ १३६ ॥<br>विद्येश्वरप्रिया विद्या विद्युज्जिह्वा जितश्रमा।<br>विद्यामयी सहस्त्राक्षी सहस्रवदनात्मजा ॥ १३७ ॥सर्वेन्द्रियमनोमाता, सर्वभूतहृदिस्थिता, संसारतारिणी, विद्या, ब्रह्मवादिमनोलया, ब्रह्माणी, बृहती, ब्राह्मी, ब्रह्मभूता, भवारणि, हिरण्मयी, महारात्रि, संसारपरिवर्तिका, सुमालिनी, सुरूपा, भाविनी, तारिणी, प्रभा, उन्मीलनी, सर्वसहा, सर्वप्रत्ययसाक्षिणी, सुसौम्या, चन्द्रवदना, ताण्डवासक्तमानसा, सत्त्वशुद्धिकरी*, शुद्धि, मलत्रयविनाशिनी, जगत्प्रिया, जगन्मूर्ति, त्रिमूर्ति, अमृताश्रया, निराश्रया, निराहारा, निरङ्कुरवनोद्भवा, चन्द्रहस्ता, विचित्राङ्गी, स्रग्विणी, पद्मधारिणी, परावरविधानज्ञा, महापुरुषपूर्वजा, विद्येश्वरप्रिया, विद्या, विद्युज्जिह्वा, जितश्रमा, विद्यामयी, सहस्राक्षी, सहस्रवदनात्मजा ॥ १३१—१३७ ॥
सहस्ररश्मिः सत्त्वस्था महेश्वरपदाश्रया।<br>क्षालिनी सन्मयी व्याप्ता तैजसी पद्मबोधिका ॥ १३८ ॥<br>महामायाश्रया मान्या महादेवमनोरमा।<br>व्योमलक्ष्मीः सिंहस्था चेकितानामितप्रभा ॥ १३९ ॥<br>वीरेश्वरी विमानस्था विशोका शोकनाशिनी।<br>अनाहता कुण्डलिनी नलिनी पद्मवासिनी ॥ १४० ॥<br>सदानन्दा सदाकीर्तिः सर्वभूताश्रयस्थिता।<br>वाग्देवता ब्रह्मकला कलातीता कलारणिः ॥ १४१ ॥<br>ब्रह्मश्रीर्ब्रह्महृदया ब्रह्मविष्णुशिवप्रिया।<br>व्योमशक्तिः क्रियाशक्तिर्ज्ञानशक्तिः परागतिः ॥ १४२ ॥<br>क्षोभिका बन्धिका भेद्या भेदाभेदविवर्जिता।<br>अभिन्नाभिन्नसंस्थाना वंशिनी वंशहारिणी ॥ १४३ ॥<br>गुह्यशक्तिर्गुणातीता सर्वदा सर्वतोमुखी।<br>भगिनी भगवत्पत्नी सकला कालकारिणी ॥ १४४ ॥सहस्ररश्मि, सत्त्वस्था, महेश्वरपदाश्रया, क्षालिनी, सन्मयी, व्याप्ता, तैजसी, पद्मबोधिका, महामायाश्रया, मान्या, महादेवमनोरमा, व्योमलक्ष्मी, सिंहस्था, चेकिताना, अमितप्रभा, वीरेश्वरी, विमानस्था, विशोका, शोकनाशिनी, अनाहता, कुण्डलिनी, नलिनी, पद्मवासिनी, सदानन्दा, सदाकीर्ति, सर्वभूताश्रयस्थिता, वाग्देवता, ब्रह्मकला, कलातीता, कलारणि, ब्रह्मश्री, ब्रह्महृदया, ब्रह्मविष्णुशिवप्रिया, व्योमशक्ति, क्रियाशक्ति, ज्ञानशक्ति, परागति, क्षोभिका, बन्धिका, भेद्या, भेदाभेदविवर्जिता, अभिन्ना, अभिन्नसंस्थाना, वंशिनी, वंशहारिणी, गुह्यशक्ति, गुणातीता, सर्वदा, सर्वतोमुखी, भगिनी, भगवत्पत्नी, सकला, कालकारिणी ॥ १३८—१४४ ॥
सर्ववित् सर्वतोभद्रा गुह्यातीता गुहारणिः।<br>प्रक्रिया योगमाता च गङ्गा विश्वेश्वरेश्वरी ॥ १४५ ॥<br>कपिला कापिला कान्ता कनकाभा कलान्तरा।<br>पुण्या पुष्करिणी भोक्त्री पुरंदरपुरस्सरा ॥ १४६ ॥<br>पोषणी परमैश्वर्यभूतिदा भूतिभूषणा।<br>पञ्चब्रह्मसमुत्पत्तिः परमार्थार्थविग्रहा ॥ १४७ ॥<br>धर्मोदया भानुमती योगिज्ञेया मनोजवा।<br>मनोहरा मनोरक्षा तापसी वेदरूपिणी ॥ १४८ ॥सर्ववित्, सर्वतोभद्रा, गुह्यातीता, गुहारणि, प्रक्रिया, योगमाता, गङ्गा, विश्वेश्वरेश्वरी, कपिला, कापिला, कान्ता, कनकाभा, कलान्तरा, पुण्या, पुष्करिणी, भोक्त्री, पुरंदरपुरस्सरा, पोषणी, परमैश्वर्यभूतिदा, भूतिभूषणा, पञ्चब्रह्मसमुत्पत्ति, परमार्थार्थविग्रहा, धर्मोदया, भानुमती, योगिज्ञेया, मनोजवा, मनोहरा, मनोरक्षा, तापसी, वेदरूपिणी ॥ १४५—१४८ ॥

* सत्त्व (चित्त)।