संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| ७४ | * कूर्मपुराण * |
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| निर्यन्त्रा यन्त्रवाहस्था नन्दिनी भद्रकालिका।<br>आदित्यवर्णा कौमारी मयूरवरवाहिनी ॥ ११३ ॥<br>वृषासनगता गौरी महाकाली सुरार्चिता।<br>अदितिर्नियता रौद्री पद्मगर्भा विवाहना ॥ ११४ ॥<br>विरूपाक्षी लेलिहाना महापुरनिवासिनी।<br>महाफलानवद्याङ्गी कामपूरा विभावरी ॥ ११५ ॥<br>विचित्ररत्नमुकुटा प्रणतार्तिप्रभञ्जिनी।<br>कौशिकी कर्षणी रात्रिस्त्रिदशार्तिविनाशिनी ॥ ११६ ॥<br>बहुरूपा सुरूपा च विरूपा रूपवर्जिता।<br>भक्तार्तिशमनी भव्या भवभावविनाशिनी ॥ ११७ ॥<br>निर्गुणा नित्यविभवा निःसारा निरपत्रपा।<br>यशस्विनी सामगीतिर्भवाङ्गनिलयालया ॥ ११८ ॥<br>दीक्षा विद्याधरी दीप्ता महेन्द्रविनिपातिनी।<br>सर्वातिशायिनी विद्या सर्वसिद्धिप्रदायिनी ॥ ११९ ॥<br>सर्वेश्वरप्रिया तार्क्ष्या समुद्रान्तरवासिनी।<br>अकलङ्का निराधारा नित्यसिद्धा निरामया ॥ १२० ॥<br>कामधेनुर्बृहद्गर्भा धीमती मोहनाशिनी।<br>निःसङ्कल्पा निरातङ्का विनया विनयप्रदा ॥ १२१ ॥<br>ज्वालामालासहस्राढ्या देवदेवी मनोन्मनी।<br>महाभगवती दुर्गा वासुदेवसमुद्भवा ॥ १२२ ॥<br>महेन्द्रोपेन्द्रभगिनी भक्तिगम्या परावरा।<br>ज्ञानज्ञेया जरातीता वेदान्तविषया गतिः ॥ १२३ ॥<br>दक्षिणा दहना दाह्या सर्वभूतनमस्कृता।<br>योगमाया विभावज्ञा महामाया महीयसी ॥ १२४ ॥<br><br>संध्या सर्वसमुद्भूतिर्ब्रह्मवृक्षाश्रयानतिः।<br>बीजाङ्कुरसमुद्भूतिर्महाशक्तिर्महामतिः ॥ १२५ ॥<br>ख्यातिः प्रज्ञा चितिः संवित् महाभोगीन्द्रशायिनी।<br>विकृतिः शांकरी शास्त्री गणगन्धर्वसेविता ॥ १२६ ॥<br>वैश्वानरी महाशाला देवसेना गुहप्रिया।<br>महारात्रिः शिवानन्दा शचीदुःस्वप्ननाशिनी ॥ १२७ ॥<br>इज्या पूज्या जगद्धात्री दुर्विज्ञेया सुरूपिणी।<br>गुहाम्बिका गुणोत्पत्तिर्महापीठा मरुत्सुता ॥ १२८ ॥<br>हव्यवाहान्तरागादिः हव्यवाहसमुद्भवा।<br>जगद्योनिर्जगन्माता जन्ममृत्युजरातिगा ॥ १२९ ॥<br>बुद्धिमाता बुद्धिमती पुरुषान्तरवासिनी।<br>तरस्विनी समाधिस्था त्रिनेत्रा दिविसंस्थिता ॥ १३० ॥ | निर्यन्त्रा, यन्त्रवाहस्था, नन्दिनी, भद्रकालिका, आदित्यवर्णा, कौमारी, मयूरवरवाहिनी, वृषासनगता, गौरी, महाकाली, सुरार्चिता, अदिति, नियता, रौद्री, पद्मगर्भा, विवाहना, विरूपाक्षी, लेलिहाना, महापुरनिवासिनी, महाफला, अनवद्याङ्गी, कामपूरा, विभावरी, विचित्ररत्नमुकुटा, प्रणतार्तिप्रभञ्जिनी, कौशिकी, कर्षणी, रात्रि, त्रिदशार्तिविनाशिनी, बहुरूपा, सुरूपा, विरूपा, रूपवर्जिता, भक्तार्तिशमनी, भव्या, भवभावविनाशिनी ॥ ११३—११७ ॥<br><br>निर्गुणा, नित्यविभवा, निःसारा, निरपत्रपा, यशस्विनी, सामगीति, भवाङ्गनिलयालया, दीक्षा, विद्याधरी, दीप्ता, महेन्द्रविनिपातिनी, सर्वातिशायिनी, विद्या, सर्वसिद्धिप्रदायिनी, सर्वेश्वरप्रिया, तार्क्ष्या, समुद्रान्तरवासिनी, अकलंका, निराधारा, नित्यसिद्धा, निरामया, कामधेनु, बृहद्गर्भा, धीमती, मोहनाशिनी, निःसङ्कल्पा, निरातङ्का, विनया, विनयप्रदा, ज्वालामालासहस्राढ्या, देवदेवी, मनोन्मनी, महाभगवती, दुर्गा, वासुदेवसमुद्भवा, महेन्द्रोपेन्द्रभगिनी, भक्तिगम्या, परावरा, ज्ञानज्ञेया, जरातीता, वेदान्तविषया, गति, दक्षिणा, दहना, दाह्या, सर्वभूतनमस्कृता, योगमाया, विभावज्ञा, महामाया, महीयसी ॥ ११८—१२४ ॥<br><br>संध्या, सर्वसमुद्भूति, ब्रह्मवृक्षाश्रयानति, बीजाङ्कुरसमुद्भूति, महाशक्ति, महामति, ख्याति, प्रज्ञा, चिति, संवित्, महाभोगीन्द्रशायिनी, विकृति, शांकरी, शास्त्री, गणगन्धर्वसेविता, वैश्वानरी, महाशाला, देवसेना, गुहप्रिया, महारात्रि, शिवानन्दा, शची, दुःस्वप्ननाशिनी, इज्या, पूज्या, जगद्धात्री, दुर्विज्ञेया, सुरूपिणी, गुहाम्बिका, गुणोत्पत्ति, महापीठा, मरुत्सुता, हव्यवाहान्तरागादि, हव्यवाहसमुद्भवा, जगद्योनि, जगन्माता, जन्ममृत्युजरातिगा, बुद्धिमाता, बुद्धिमती, पुरुषान्तरवासिनी, तरस्विनी, समाधिस्था, त्रिनेत्रा, दिविसंस्थिता ॥ १२५—१३० ॥ |