संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| *अध्याय ११ * | ७७ |
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| लोहिता सर्पमाला च भीषणी वनमालिनी ।<br>अनन्तशयनानन्या नरनारायणोद्भवा ॥ १६७॥<br>नृसिंही दैत्यमथनी शङ्खचक्रगदाधरा ।<br>संकर्षणसमुत्पत्तिरम्बिकापादसंश्रया ॥ १६८॥<br>महाज्वाला महामूर्तिः सुमूर्तिः सर्वकामधुक् ।<br>सुप्रभा सुस्तना गौरी धर्मकामार्थमोक्षदा ॥ १६९॥<br>भ्रूमध्यनिलया पूर्वा पुराणपुरुषाणिः ।<br>महाविभूतिदा मध्या सरोजनयना समा ॥ १७०॥<br>अष्टादशभुजानाद्या नीलोत्पलदलप्रभा ।<br>सर्वशक्त्यासनाारूढा धर्माधर्मार्थवर्जिता ॥ १७१॥<br>वैराग्यज्ञाननिरता निरालोका निरिन्द्रिया ।<br>विचित्रगहनाधारा शाश्वतस्थानवासिनी ॥ १७२॥<br>स्थानेश्वरी निरानन्दा त्रिशूलवरधारिणी ।<br>अशेषदेवतामूर्तिर्देवता वरदेवता ।<br>गणाम्बिका गिरेः पुत्री निशुम्भविनिपातिनी ॥ १७३॥ | लोहिता, सर्पमाला, भीषणी, वनमालिनी अनन्तशयना, अनन्या, नरनारायणोद्भवा, नृसिंही, दैत्यमथनी, शङ्खचक्रगदाधरा, संकर्षणसमुत्पत्ति, अम्बिकापदसंश्रया, महाज्वाला, महामूर्ति, सुमूर्ति, सर्वकामधुक्, सुप्रभा, सुस्तना, गौरी, धर्मकामार्थमोक्षदा, भ्रूमध्यनिलया, पूर्वा, पुराणपुरुषाणि, महाविभूतिदा, मध्या, सरोजनयना, समा, अष्टादशभुजा, अनाद्या, नीलोत्पलदलप्रभा, सर्वशक्त्यासनाारूढा, धर्माधर्मार्थवर्जिता, वैराग्यज्ञाननिरता, निरलोका, निरिन्द्रिया, विचित्रगहनाधारा, शाश्वतस्थानवासिनी, स्थानेश्वरी, निरानन्दा, त्रिशूलवरधारिणी, अशेषदेवतामूर्ति, देवता, वरदेवता, गणाम्बिका, गिरेः पुत्री (गिरिपुत्री), निशुम्भविनिपातिनी ॥ १६७-१७३ ॥ |
| अवर्णा वर्णरहिता निवर्णा बीजसम्भवा ।<br>अनन्तवर्णानन्यस्था शंकरी शान्तमानसा ॥ १७४॥<br>अगोत्रा गोमती गोप्त्री गुह्यरूपा गुणोत्तरा ।<br>गौर्गीर्गव्यप्रिया गौणी गणेशवरनमस्कृता ॥ १७५॥<br>सत्यमात्रा सत्यसंधा त्रिसंध्या संधिवर्जिता ।<br>सर्ववादाश्रया संख्या सांख्ययोगसमुद्भव ॥ १७६॥<br>असंख्येयाप्रमेयाख्या शून्या शुद्धकुलोद्भवा ।<br>बिन्दुनादसमुत्पत्तिः शम्भुवामा शशिप्रभा ॥ १७७॥<br>विसङ्गा भेदरहिता मनोज्ञा मधुसूदनी ।<br>महाश्रीः श्रीसमुत्पत्तिस्तमःपारेप्रतिष्ठिता ॥ १७८॥<br>त्रितत्त्वमाता त्रिविधा सुसूक्ष्मपदसंश्रया ।<br>शान्त्यतीता मलातीता निर्विकारा निराश्रया ॥ १७९॥<br>शिवाख्या चित्तनिलया शिवज्ञानस्वरूपिणी ।<br>दैत्यदानवनिर्मात्री काश्यपी कालकल्पिका ॥ १८०॥ | अवर्णा, वर्णरहिता, निवर्णा, बीजसम्भवा, अनन्तवर्णा, अनन्यस्था, शंकरी, शान्तमानसा, अगोत्रा, गोमती, गोप्त्री, गुह्यरूपा, गुणोत्तरा, गौः (गौ), गीः, गव्यप्रिया, गौणी, गणेश्वरनमस्कृता, सत्यमात्रा, सत्यसंधा, त्रिसंध्या, संधिवर्जिता, सर्ववादाश्रया, संख्या, सांख्ययोगसमुद्भवा, असंख्येया, अप्रमेयाख्या, शून्या, शुद्धकुलोद्भवा, बिन्दुनादसमुत्पत्ति, शम्भुवामा, शशिप्रभा, विसङ्गा, भेदरहिता, मनोज्ञा, मधुसूदनी, महाश्रीः (महाश्री) श्रीसमुत्पत्ति, तमःपारेप्रतिष्ठिता, त्रितत्त्वमाता, त्रिविधा, सुसूक्ष्मपदसंश्रया, शान्त्यतीता, मलातीता, निर्विकारा, निराश्रया, शिवाख्या, चित्तनिलया, शिवज्ञानस्वरूपिणी, दैत्यदानवनिर्मात्री, काश्यपी, कालकल्पिका ॥ १७४-१८० ॥ |
| शास्त्रयोनिः क्रियामूर्तिश्चतुर्वर्गप्रदर्शिका ।<br>नारायणी नरोद्भूतिः कौमुदी लिङ्गधारिणी ॥ १८१॥<br>कामुकी ललिता भावा परापरविभूतिदा ।<br>परान्तजातमहिमा बडवा वामलोचना ॥ १८२॥<br>सुभद्रा देवकी सीता वेदवेदाङ्गपारगा ।<br>मनस्विनी मन्युमाता महामन्युसमुद्भवा ॥ १८३॥<br>अमृत्युरमृता स्वाहा पुरुहूता पुरुष्टुता ।<br>अशोच्या भिन्नविषया हिरण्यरजतप्रिया ॥ १८४॥ | शास्त्रयोनि, क्रियामूर्ति, चतुर्वर्गप्रदर्शिका, नारायणी, नरोद्भूति, कौमुदी, लिंगधारिणी, कामुकी, ललिता, भावा, परापरविभूतिदा, परान्तजातमहिमा, बडवा, वामलोचना, सुभद्रा, देवकी, सीता, वेदवेदाङ्गपारगा, मनस्विनी, मन्युमाता, महामन्युसमुद्भवा, अमृत्यु, अमृता, स्वाहा, पुरुहूता, पुरुष्टुता, अशोच्या, भिन्नविषया, हिरण्यरजतप्रिया ॥ १८१-१८४ ॥ |