संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७८ * कूर्मपुराण *
| हिरण्या राजती हैमी हेमाभरणभूषिता।<br>विभ्राजमाना दुर्जेया ज्योतिष्टोमफलप्रदा ॥ १८५ ॥<br>महानिद्रासमुद्भूतिरनिद्रा सत्यदेवता।<br>दीर्घा ककुद्मिनी हृद्या शान्तिदा शान्तिवर्धिनी ॥ १८६ ॥<br>लक्ष्यादिशक्तिजननी शक्तिचक्रप्रवर्तिका।<br>त्रिशक्तिजननी जन्या षडूर्म्मिपरिवर्जिता ॥ १८७ ॥<br>सुधामा कर्मकरणी युगान्तदहनात्मिका।<br>संकर्षणी जगद्धात्री कामयोनिः किरीटिनी ॥ १८८ ॥<br>ऐन्द्री त्रैलोक्यनमिता वैष्णवी परमेश्वरी।<br>प्रद्युम्नदयिता दान्ता युग्मदृष्टिस्त्रिलोचना ॥ १८९ ॥<br>मदोत्कटा हंसगतिः प्रचण्डा चण्डविक्रमा।<br>वृषावेशा वियन्माता विन्ध्यपर्वतवासिनी ॥ १९० ॥<br>हिमवन्मेरुनिलया कैलासगिरिवासिनी।<br>चाणूरहन्तृतनया नीतिज्ञा कामरूपिणी ॥ १९१ ॥<br>वेदविद्याव्रतस्नाता धर्मशीलानिलाशना।<br>वीरभद्रप्रिया वीरा महाकालसमुद्भवा ॥ १९२ ॥<br>विद्याधरप्रिया सिद्धा विद्याधरनिराकृतिः।<br>आप्यायनी हरन्ती च पावनी पोषणी खिला ॥ १९३ ॥<br>मातृका मन्मथोद्भूता वारिजा वाहनप्रिया।<br>करीषिणी सुधावाणी वीणावादनतत्परा ॥ १९४ ॥<br>सेविता सेविका सेव्या सिनीवाली गरुत्मती।<br>अरुन्धती हिरण्याक्षी मृगाङ्का मानदायिनी ॥ १९५ ॥<br>वसुप्रदा वसुमती वसोर्धारा वसुंधरा।<br>धाराधरा वरारोहा वरावरसहस्रदा ॥ १९६ ॥<br>श्रीफला श्रीमती श्रीशा श्रीनिवासा शिवप्रिया।<br>श्रीधरा श्रीकरी कल्या श्रीधरार्धशरीरिणी ॥ १९७ ॥<br>अनन्तदृष्टिरक्षुद्रा धात्रीशा धनदप्रिया।<br>निहन्त्री दैत्यसङ्घानां सिंहिका सिंहवाहना ॥ १९८ ॥<br>सुषेणा चन्द्रनिलया सुकीर्तिश्छिन्नसंशया।<br>रसज्ञा रसदा रामा लेलिहानामृतस्रवा ॥ १९९ ॥<br>नित्योदिता स्वयंज्योतिरुत्सुका मृतजीवनी।<br>वज्रदण्डा वज्रजिह्वा वैदेही वज्रविग्रहा ॥ २०० ॥<br>मङ्गल्या मङ्गला माला मलिना मलहारिणी।<br>गान्धर्वी गारुडी चान्द्री कम्बलाश्वतरप्रिया ॥ २०१ ॥<br>सौदामिनी जनानन्दा भुकुटीकुटिलानना।<br>कर्णिकारकरा कक्ष्या कंसप्राणापहारिणी ॥ २०२ ॥<br>युगंधरा युगावर्ता त्रिसंध्या हर्षवर्धिनी।<br>प्रत्यक्षदेवता दिव्या दिव्यगन्धा दिवापरा ॥ २०३ ॥ | हिरण्या, राजती, हैमी, हेमाभरणभूषिता, विभ्राजमाना, दुर्जेया, ज्योतिष्टोमफलप्रदा, महानिद्रासमुद्भूति, अनिद्रा, सत्यदेवता, दीर्घा, ककुद्मिनी, हृद्या, शान्तिदा, शान्तिवर्धिनी, लक्ष्यादिशक्तिजननी, शक्तिचक्रप्रवर्तिका, त्रिशक्ति-जननी, जन्या, षडूर्म्मिपरिवर्जिता, सुधामा, कर्मकरणी, युगान्तदहनात्मिका, संकर्षणी, जगद्धात्री, कामयोनि, किरीटिनी, ऐन्द्री, त्रैलोक्यनमिता, वैष्णवी, परमेश्वरी, प्रद्युम्नदयिता, दान्ता, युग्मदृष्टि, त्रिलोचना ॥ १८५–१८९ ॥<br><br>मदोत्कटा, हंसगति, प्रचण्डा, चण्डविक्रमा, वृषावेशा, वियन्माता, विन्ध्यपर्वतवासिनी, हिमवन्मेरुनिलया, कैलासगिरिवासिनी, चाणूरहन्तृतनया, नीतिज्ञा, कामरूपिणी, वेदविद्याव्रतस्नाता, धर्मशीला, अनिलाशना, वीरभद्रप्रिया, वीरा, महाकालसमुद्भवा, विद्याधरप्रिया, सिद्धा, विद्याधरनिराकृति, आप्यायनी, हरन्ती, पावनी, पोषणी, खिला, मातृका, मन्मथोद्भूता, वारिजा, वाहनप्रिया, करीषिणी, सुधावाणी, वीणावादनतत्परा, सेविता, सेविका, सेव्या, सिनीवाली, गरुत्मती, अरुन्धती, हिरण्याक्षी, मृगाङ्का, मानदायिनी, वसुप्रदा, वसुमती, वसोर्धारा, वसुंधरा, धाराधरा, वरारोहा, वरावरसहस्रदा ॥ १९०–१९६ ॥<br><br>श्रीफला, श्रीमती, श्रीशा, श्रीनिवासा, शिवप्रिया, श्रीधरा, श्रीकरी, कल्या, श्रीधरार्धशरीरिणी, अनन्तदृष्टि, अक्षुद्रा, धात्रीशा, धनदप्रिया, दैत्यसंघानां निहन्त्री (दैत्यसंघनिहन्त्री), सिंहिका, सिंहवाहना, सुषेणा, चन्द्रनिलया, सुकीर्ति, छिन्नसंशया, रसज्ञा, रसदा, रामा, लेलिहाना, अमृतस्रवा, नित्योदिता, स्वयंज्योति, उत्सुका, मृतजीवनी, वज्रदण्डा, वज्रजिह्वा, वैदेही, वज्रविग्रहा, मङ्गल्या, मङ्गला, माला, मलिना, मलहारिणी, गान्धर्वी, गारुडी, चान्द्री, कम्बलाश्वतरप्रिया ॥ १९७–२०१ ॥<br><br>सौदामिनी, जनानन्दा, भुकुटीकुटिलानना, कर्णिकारकरा, कक्ष्या, कंसप्राणापहारिणी, युगंधरा, युगावर्ता, त्रिसंध्या, हर्षवर्धिनी, प्रत्यक्षदेवता, दिव्या, दिव्यगन्धा, दिवापरा ॥ २०२–२०३ ॥ |