भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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तस्मै पाणिनये नमः (१) येन धौता गिरः पुंसां विमलैः शब्दवारिभिः। तमश्चाज्ञानजं भिन्नं तस्मै पाणिनये नमः॥ (२) अज्ञानान्धस्य लोकस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै पाणिनये नमः॥ (३) प्रमाणभूत आचार्यो दर्भपवित्रपाणिः शुचाववकाशे प्राङ्मुख उपविश्य महता यत्नेन सूत्रं प्रणयति स्म। तत्राशक्यं वर्णेना- प्यनर्थकेन भवितुं किं पुनरियता सूत्रेण। (४) तदनल्पमतेर्वचनं स्मरत। (५) तदाचार्यः सुहृद् भूत्वाऽन्वाचष्टे। (६) शोभना खलु पाणिनेः सूत्रस्य कृतिः। (७) आकुमारं यशः पाणिनेः। (८) महती सूक्ष्मेक्षिका वर्त्तते सूत्रकारस्य। (६) सर्ववेदपारिषदं हीदं शास्त्रम्। (१०) यच्छन्द आह तदस्माकं प्रमाणम्। १. पाणिनीयशिक्षा (५८)। २. पाणिनीयशिक्षा (५६)। ३. महाभाष्य (१.१.१)। ४. महाभाष्य (१.४.५१)। ५. महाभाष्य (१.२.३२)। ६. महाभाष्य (२.३.६६)। ७. महाभाष्य (१.४.८६)। ८. काशिका (४.२.७४)। ६. महाभाष्य (२.१.५८)। ०. महाभाष्य (२.१.१)।

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