भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 504

हलन्त-स्त्रीलिङ्ग-प्रकरणम् ४८१ विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्र० ॰ ॰ आपः प० ॰ ॰ अद्द्भ्यः द्वि० ॰ ॰ अपः ष० ॰ ॰ अपाम् तृ० ॰ ॰ अद्भिः स० ॰ ॰ अप्सु च० ॰ ॰ अद्द्भ्यः सं० ॰ ॰ हे आपः! (यहां पकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों का विवेचन समाप्त होता है।) —:०:— [लघु०] दिक्, दिग्। दिशः। दिग्भ्याम्॥ व्याख्या—दिक् (दिशा)। यह शब्द ऋत्विग्वद्धृक्० (३०१) सूत्र से क्विन्नन्त निपातन किया गया है। दिश्+सुं। सुंलोप, व्रश्चभ्रस्ज० (३०७) से षत्व, झलां जशोऽन्ते (६७) से डत्व, क्विन्प्रत्ययस्य कुः (३०४) से गकार तथा वाऽवसाने (१४६) से वैकल्पिक चर्त्व=ककार करने से—‘दिक्, दिग्’ ये दो रूप सिद्ध होते हैं। दिश्+भ्याम्। पदान्त में षत्व, डत्व और कुत्व होकर—दिग्भ्याम्। ‘दिक्’ शब्द की रूपमाला यथा— प्र० दिक्-ग् दिशौ दिशः प० दिशः दिग्भ्याम् दिग्भ्यः द्वि० दिशम् ,, ,, ष० ,, दिशोः दिशाम् तृ० दिशा दिग्भ्याम् दिग्भिः स० दिशि ,, दिक्षु च० दिशे ,, दिग्भ्यः सं० हे दिक्-ग्! दिशौ! दिशः! इसी शब्द का आपं चैव हलन्तानाम् से आप् करने पर ‘दिशा’ शब्द बन जाता है, तब ‘रमा’ की तरह रूप चलते हैं। इसे अव्ययप्रकरण के अन्त में देखें। [लघु०] त्यदादिषु० (३४७) इति दृशेः क्विग्विधानादन्यत्रापि कुत्वम्। दृक्, दृग्। दृशौ। दृग्भ्याम्॥ व्याख्या—दृश् (आंख, दृष्टि)। दृश्यन्तेऽर्था अनयेति विग्रहे सम्पदादित्वाद् दृशेः क्विप्ँ। ‘दृश्’ शब्द क्विबन्त है क्विन्नन्त नहीं। दृश्+सुँ। यहां अपृक्त सकार का लोप होकर पदान्त में व्रश्चभ्रस्ज० (३०७) सूत्र से शकार को षकार, झलां जशोऽन्ते (६७) से षकार को डकार, क्विन्प्रत्ययस्य कुः (३०४) से डकार को कुत्व-गकार तथा वाऽवसाने (१४६) सूत्र से वैकल्पिक चर्त्व-ककार करने से—‘दृक्, दृग्’ ये दो रूप बनते हैं। वक्तव्य—यद्यपि यहां क्विन् प्रत्यय न होने से क्विन्प्रत्ययस्य कुः (३०४) द्वारा कुत्व न होना चाहिये था; तथापि ‘क्विन्प्रत्ययो यस्मात्’ ऐसा विग्रह कर बहु- व्रीहिसमास स्वीकार करने से कुत्व हो जाता है कोई दोष प्रसक्त नहीं होता। तात्पर्य यह है कि जिस धातु से कहीं भी क्विन्प्रत्यय देखा गया हो चाहे अब उस से वह किया गया हो या न हो उसे कुत्व हो जायेगा। ‘दृश्’ धातु से यहां तो क्विन् नहीं