भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 607, कुल 633 में से

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पृष्ठ 607

५६२ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् ४१९ रह (५६२) ४५५ शुवम् (५४८) ४९१ साचि (५३३) ४२० राजवत् (५७६) ४५६ शुवनी (५७४) ४९२ सामि (५२२) ४२१ राजसात् (५७५) ४५७ शुदि (५३३) ४९३ साम्प्रतम् (५३४) ४२२ रात्रीं (५१८) ४५८ शुभम् (५४६) ४९४ सायम् (५१६) ४२३ रे (५५०) ४५९ धियसे (५७८) ४९५ साधम् (५२६) ४२४ रे रे (५५०) ४६० श्रौषट् (५२६) ४९६ सु (५३४) ४२५ रै (५८२) ४६१ श्व (५१८) ४९७ सुदामत (५७५) ४२६ रोहिष्यै (५७८) ४६२ षड्धा (५७३) ४९८ सुदि (५३३) ४२७ व (५६०) ४६३ षोढा (५७३) ४९९ सुष्ठु (५३४) ४२८ वक्षे (५७७) ४६४ सकृत् (५७५) ५०० सूतवे (५७८) ४२९ वत् (५२२, ५७५) ४६५ स्ना (५३२) ५०१ सूपत (५३६) ४३० वदि (५३२) ४६६ स्ता (५६६) ५०२ स्तोवश (५७४) ४३१ वरम् (५३३) ४६७ सद्य (५७०) ५०३ स्थाने (५३३) ४३२ वषट् (५२६) ४६८ सनत (५२३) ५०४ स्म (५४५) ४३३ वस्तुत (५६१) ४६९ सना (५२२) ५०५ स्मारंस्मारम् ५७६ ४३४ वा (५३६) ४७० सनात (५२३) ५०६ स्वाक् (५६२) ४३५ वाम (५५६) ४७१ समुन (५१६) ५०७ स्वधा (५२५) ४३६ वारंवारम् ५६१ ४७२ सपदि (५३२) ५०८ स्वयम् (५२०) ४३७ वागुदवत् ५७४ ४७३ सप्तकृत्व (५७५) ५०९ स्व (५१५) ४३८ विख्य (५७८) ४७४ सप्तधा (५७३) ५१० स्वस्ति (५२५) ४३९ विना (५२५) ४७५ समन्तत (५६०) ५११ स्वाहा (५४३) ४४० विभाजम् ५७७) ४७६ समन्त (५६०) ५१२ स्वित (५५४) ४४१ विपु (५५०) ४७७ समम (५३२) ५१३ ह (५३७) ४४२ विमृप (५७६) ४७८ समया (५२०) ५१४ हत (५४०) ४४३ विहायसा (५२७) ४७९ समुपलेपम् ५६२ ५१५ हहो (५५१) ४४४ वीयत (५७४) ४८० सम्प्रति (५३४) ५१६ हा (५५१) ४४५ वृत्तत (५७४) ४८१ सचन (५६७) ५१७ हि (५५६) ४४६ वृथा (५२१) ४८२ सद्यन (५६८) ५१८ हिमवत्त (५७५) ४४७ वै (५६०) ४८३ सवथ (५७०) ५१९ हिरुक् (५३०) ४४८ वौषट् (५२६) ४८४ संवदा (५६६) ५२० ही (५६०) ४४९ शकम् (५४८) ४८५ सह (५५२) ५२१ हे (५४६) ४५० शनश (५७४) ४८६ सहसा (५२५) ५२२ हेतौ (५२१) ४५१ शनै (५१७) ४८७ सहस्रश (५७४) ५२३ है (५४६) ४५२ शनैश्शनै ५१७) ४८८ सवत (५३२) ५२४ ह्य (५१८) ४५३ शम (५२५) ४८९ सामम् (५२६) ———————— ४५४ शश्वत (५३८) ४९० साक्षात् (५३३)

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