लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(५) अव्ययप्रकरणम् । लघुकौमुदी का अव्ययप्रकरण भैमीव्याख्यासहित पृथक् छपवाया गया है। इस में लगभग सवा पाच सौ अव्ययों का सोदाहरण साङ्गोपाङ्ग विवेचन प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक अव्यय पर वैदिक वा लौकिक संस्कृतसाहित्य से अनेक सुन्दर सुभाषितों वा सूक्तियों का संकलन किया गया है। कठिन सूक्तियों का अर्थ भी साथ में दे दिया गया है। आजतक इतना शोधपूर्ण परिश्रम इस प्रकरण पर पहली बार देखने में आया है। साहित्यप्रेमी विद्यार्थियों तथा शोध में लगे जिज्ञासुओं के लिये यह ग्रन्थ विशेष उपादेय है। सुन्दर अंग्रेजी सिलाई, आकर्षक जिल्द। मूल्य केवल पच्चीस रु० । (६) वैयाकरण-भूषणसार (धात्वर्थनिर्णय) भैमीभाष्य । इस हिन्दी भाष्य से इस ग्रन्थ की दुष्टता समाप्त हो गई है। अब परीक्षा में भूषणसार की पक्तियों को रटने की कोई आवश्यकता नहीं रही। सरल भाषा में लिखे इस ग्रन्थ का एक बार पारायण करना ही पर्याप्त है। देश-विदेश में समानरूप से आदृत यह ग्रन्थ विद्वत्समाज में अपना गौरवपूर्ण स्थान पा चुका है। मजिल्द मूल्य केवल तीस रुपये । (७) बालमनोरमा-भ्रान्ति-दिग्दर्शन । यह निबन्ध विद्वत्समाज की आंखो को खोलने वाला विलक्षण शोधपत्र है। एक बार पढ जाइये, ज्ञानवृद्धि के साथ साथ आप का मनोरञ्जन भी होगा। मूल्य केवल पांच रुपये । (८) प्रत्याहारसूत्रों का निर्माता कौन ? । इति माहेश्वराणि सूत्राणि—के अन्धविश्वासरूप तिमिर से मुक्त होने के लिये यह शोधपत्र प्रत्येक जिज्ञासु के लिये सङ्ग्रहणीय, मननीय तथा अभ्यसनीय है। अश्रुतपूर्वं दर्जनों प्रमाणों के आलोक में निश्चय ही वर्षो से छाया इस विषय का अज्ञान मिट जायेगा। मूल्य केवल बारह रु० । (६) न्यास-पर्यालोचन । यह ग्रन्थ व्याकरणसम्बन्धी सैकडो अछूत विषयो का आगार है। इस प्रकार का शोधपूर्ण प्रयत्न व्याकरणविषय पर प्रथम बार प्रकाशित हुआ है। इस के विषयवार वैशिष्ट्य के लिये पुस्तकसूची देखें। स्क्रीन प्रिंटिड सुन्दर जिल्द, पक्की अंग्रेजी सिलाई। मूल्य केवल एक सौ रु० । विद्यार्थियों तथा अध्यापको को विशेष कमीशन दिया जाता है। विस्तृत सूचीपत्र के लिए लिखें— भैमी प्रकाशन ५३७, लाजपतराय मार्केट, दिल्ली-११०००६