लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८६ ) लीलावती । अन्वयः–छिदः अंशैः विभजेत् । अथ तैः विमिश्रैः रूपं विभजेत् । तदा परिपू- र्तिकालः स्यात् ॥ २३ ॥ अर्थः–हरोंमें अंशोंका भाग दे, फिर हरोंमें भाग देनेसे जो लब्धि हुई है, उनका योग करके उस योगका एक १ में भाग दे तब भर जानेका समय लब्धि होता है ॥ २३ ॥ उदाहरणम्– ये निर्झरा दिनदिनार्द्धतृतीयषष्ठैः संपूरयन्ति हि पृथक्पृ- थगेव मुक्ताः ॥ वापीं यदा युगपदेव सखे विमुक्तास्ते केन वासरलवेन तदा वदाशु ॥ १ ॥ अन्वयः–हे सखे ! ये निर्झराः पृथक्पृथक् एव मुक्ता हि दिनदिनार्द्धतृतीयषष्ठैः वापीं संपूरयन्ति ते युगपत् एव विमुक्ताः तदा केन वासरलवेन वापीं पूरयंति इति आशु वद ? ॥ १ ॥ अर्थः–हे मित्र ! तीन झरने ( फुहारे ) हैं वह अलग २ छोडनेसे वापी ( हौज ) को एक तो एक दिनमें भरता है, दूसरा आधे दिनमें भरता है, तीसरा दिनके तीसरे भागमें, भरता है, चौथा दिनके छठे भागमें भरता है, यदि उनको एक साथ छोड़ दें तो वह चारों फुहारे मिलकर वापीको ( हौजकों ) कितनी देरमें भरेंगे सो जल्दी कहो ? ॥ १ ॥ न्यासः– १/१ १/२ १/३ १/६ लब्धो वापीपरिपूृतिकालो दिनांशाः १/१२ फैलाव–यहां चारों फुहारे दिनके १/१ १/२ १/३ १/६ इन भागोंमें पूरा करते हैं. ऊपर कही हुई रीतियोंके अनुसार अंशोंका हरोंमें भाग दिया तब क्रमसे १/१ २/१ ३/१ ६/१ इनका योग किया तो १२/१ ऐसा रूप हुआ, इसका रूप ( एक १ ) में भाग लिया तब १/१२ एकके नीचे बारह हर लब्धि हुआ, यही उत्तर है. अर्थात् सब फुहारे मिलके एक दिनके बारहवें अंशमें ( एक घंटेमें ) हौजको भर देंगे ॥ अथ क्रयविक्रये करणसूत्रं वृत्तम्– अब वस्तु मोल लेना अथवा बेचना इसकी रीति एक श्लोकमें लिखते हैं– पण्यैः स्वमूल्यानि भजेत्स्वभागैर्हत्वा तदैक्येन भजेच्च तानि ॥ भागांश्च मिश्रेण धनेन हत्वा मौल्यानि पण्यानि यथाक्रमं स्युः ॥ २४ ॥ CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri