भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ११२ ) लीलावती । सर्वधन ३६० को गुणा किया तब १४४० एक हजार चारसौ चालीस हुए फिर चयका आधा १ एक और मुख ३ तीनका अन्तर किया तब २ दो बचा इसका वर्ग किया तब ४ चार हुआ, यह द्विगुणित चयसे गुणा किये हुए सर्वधन १४४० में जोडा तब १४४४ एक हजार चारसौ चौवालीस हुए, इसका वर्गमूल लिया तब ३८ अडतीस मिले, इसमें आदि तीन ३ को घटाया तब ३५ पैंतीस रहे फिर चयका आधा १ एक जोडा तब ३६ छत्तीस हुए इसमें चय दो २ का भाग दिया तब १८ अठारह लब्धि हुए यही गच्छ है ॥ अथ द्विगुणोत्तरादिफलानयने करणसूत्रं सार्द्धं वृत्तम्- अब द्विगुणोत्तरफल ( जहाँ पहले दिन जो धन दिया; दूसरे दिन उससे द्विगुणा तीसरे दिन दूसरे दिनसे द्विगुण इस प्रकार जहां उत्तरोत्तर द्विगुणादिधन दिया जाय तहाँ फल ) जाननेकी रीति डेढ़ श्लोकमें लिखते हैं- विषमे गच्छे व्येके गुणकः स्थाप्यः समेऽर्द्धिते वर्गः ॥ गच्छक्षयान्तमन्त्याद्व्यस्तं गुणवर्गजं फलं यत्तत् ॥ ३८ ॥ व्येकं व्येकगुणोद्धृतमादिगुणं स्याद्गुणोत्तरे गणितम् ॥ अन्वयः-गच्छे विषमे सति व्येके गुणकः स्थाप्यः । गच्छे समे सति अर्द्धिते वर्गः स्थाप्यः । एवं गच्छक्षयान्तं कुर्य्यात् । अन्त्यात् यत् व्यस्तं गुणवर्गजम् फलं तत् व्येकं व्येकगुणोद्धृतम् आदिगुणं गुणोत्तरे गणितं स्यात् ॥ ३८ ॥ अर्थः-जहाँ गच्छ विषम हो तहाँ गच्छमें एक घटा दे और गुण स्थापन करे और यदि गच्छ सम हो तो आधा करके वर्ग स्थापन करे, इसी प्रकार जहाँतक गच्छ शून्य हो तहाँतक किया करे इस प्रकार गुण और वर्गकी लगार बन जाती है फिर पिछला जो गुण है उससे अपने ऊपर जो वर्ग है वहाँ वर्ग करके लिखे. फिर उस वर्ग फलको आगे गुण हो तो उससे गुणा करे और आगे वर्ग हो तो वर्ग करके रक्खे, इसी रीतिसे सबसे ऊपर जो राशि आवे उसमें एक घटा दे जो शेष बचे उसमें एक करके हीन गुणका भाग दे जो लब्धि हो उसको आदिधनसे गुणा करे जो गुणनफल हो वही सर्वधन ( द्विगुणोत्तरादिमें फल ) होगा ॥ ३८ ॥ उदाहरणम्- पूर्वं वराटकयुगं येन द्विगुणोत्तरं प्रतिज्ञातम् ॥ प्रत्यहमर्थिजनाय स मासे निष्कान्ददाति कति ॥ १ ॥ अन्वयः-येन अर्थिजनाय वराटकयुगं दत्त्वा प्रत्यहं द्विगुणोत्तरम् प्रतिज्ञातम् सः मासे कति निष्कान् ददाति ? ॥ १ ॥ CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri