भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( १७६ ) लीलावती । पहले वंशकी ओरका भूखण्ड है; १९२ दूसरे वंशकी ओरका भूखण्ड है वही क्षेत्रका स्वरूप दिखाया है ॥ अथ सूच्याबाधालंबभुजज्ञानार्थं सूत्रं वृत्तत्रयम्– अब सूचीकी आबाधा, लम्ब तथा भुज जाननेके निमित्त रीति तीन श्लोकमें– लंबहतो निजसन्धिः परलम्बगुणः समाह्वयो ज्ञेयः ॥ समपरसन्ध्योरैक्यं हारस्तेनोद्धतौ तौ च ॥ ३८ ॥ समपरसन्धौ भूघ्नौ सूच्याबाधे पृथक्स्याताम् ॥ हारहृतः परलम्बः सूचीलम्बो भवेद्भूमिः ॥ ३९ ॥ सूचीलम्बघ्नभुजौ निजनिजलम्बोद्धतौ भुजौ सूच्याः ॥ एवं क्षेत्राक्षोदः प्राज्ञैस्त्रैराशिकात्क्रियते ॥ ४० ॥ अन्वयः–निजसन्धिः परलम्बगुणः लम्बहतः समाह्वयः ज्ञेयः । समपरसन्ध्वोः ऐक्यं हारः । तौ समपरसन्धी भूघ्नो तेन उद्धृतौ च पृथक् सूच्याबाधे स्याताम्। परलम्बः भूघ्नः हारहृतः सूचीलम्बः भवेत् । सूचीलम्बघ्नभुजौ निजनिजलंबोद्धतौ सूच्याः भुजौ स्याताम् । प्राज्ञैः एवं क्षेत्राक्षोदः त्रैराशिकात् क्रियते ॥३८ ॥ ३९ ॥ ४०॥ अर्थः–अपनी सन्धिको परलंबसे गुणाकर अपने लंबका भाग दे तब जो लब्धि मिले उसको समनामसे कहते हैं और परसन्धिका योग करे तब जो अङ्क हों उनको हार माने, इस प्रकार दोनों ओरके हार बनावे, फिर सम और परसन्धिका भूमिस गुणा करे तब जो अङ्क हों उनमें दोनों स्थानोंमें उस बनाये हुए हरका भाग दे, तब जो दोनोंकी लब्धि होगी, वही सूची लंबके दोनों ओरकी आबाधा होगी परलम्बको भूमिस गुणा करनेमें जो गुणन फल हो उसमें उस ही बनाये हुए हरका भाग दे तब जो लब्धि हो वही सूची लंबका प्रमाण होगा दोनों भुजोंको सूची लंबसे गुणा करे, तब जो अङ्क हों उनमें अपने अपने लंबका भाग दे, तब जो लब्धि हों वही सूचीके भुज होंगे बुद्धिमान् इस क्षेत्रको त्रैराशिकसे भी सिद्ध करते हैं ॥ ३८ ॥ ३९ ॥ ४० ॥ अत्र किलायं लंबः २२४ अस्य सन्धिः १३२ अयं परलंबेन १८९ गुणितोऽ २२४ नेन भक्तो जातः समाह्वयः ९९/८ अस्य परसन्ध्येश्च ४८ योगो १२७५/८ हारः अनेन भूघ्नः ३०० समः २६७३००/८ परसन्धिश्च १४४००/५ भक्तो जाते सूच्याबाधे ३५६४/१७ , १५३६/१७ एवं द्वितीयसमाह्वयः CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri