लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
पृष्ठ 217, कुल 268 में से
संदर्भ में पढ़ेंखातव्यवहारः। (२०१) तीसरा भाग लिया तो ४३२ हुए यही सूची चतुर्भुजके खातका फल हुआ, समवृत्त- खातका फल जाननेके लिये पहले कही हुई "व्यासे भनन्दाग्नि" इत्यादि रीतिके अनुसार व्यास १० दशसे परिधि लाये, तो परिधिका सूक्ष्म प्रमाण ३९२७०/१२५० मिला और सूक्ष्मक्षेत्र फल ३९२७/५० मिला इसको गहराईसे गुणा करा तो ३९२७/१० हुए यही वृत्तसमखातका फल हुआ; अब इसी वृत्तखातका सूचीका आकार करा तो क्या फल होगा? इस बातके जाननेके लिये वृत्तके समखात फल ३९२७/१० का तीसरा भाग लिया तो १३०९/१० मिला. यही सूची वृत्तखातका फल है॥ इति श्रीभास्कराचार्यविरचितलीलावत्याः स्वरूपप्रका- शिकाभाषाटीकायां खातव्यवहारनिरूपणम् ॥ अथ चितिव्यवहारः । अब ईंटोंकी चुनाईका हिसाब लिखते हैं । चितिकरणसूत्रं सार्द्ध वृत्तम्- चुनाईके हिसाबको जाननेकी रीति डेढ श्लोकमें- उच्छ्रयेण गुणितं चितेः किल क्षेत्रसम्भवफलं घनं भवेत् ॥ इष्टिकाघनहते घने चितेरिष्टिकापरिमितिश्च लभ्यते ॥ ५४ ॥ इष्टिकोच्छ्रयहृदुच्छ्रितिश्चितेः स्युः स्तराश्च दृषदां चितेरपिऽऽ अन्वयः-किल चितेः क्षेत्रसम्भवफलं चितेः उच्छ्रयेण गुणितं घनं भवेत् । चितेः घने इष्टिकाघनहते इष्टिकापरिमितिः लभ्यते। चितेः उच्छ्रितिः इष्टिकोच्छ्रयहृत च स्तराः स्युः। दृषदां चितेः अपि एवम् ॥ ५४ ॥ ऽऽ ॥ अर्थः-चुनाई (चौतरे ) के क्षेत्रफलको चुनाईका उँचाईसे गुणा करे तब जो अंक हो वह चुनाईका घनफल होता है चुनाईके घनफलमें इष्टिका (ईंट) ओंके घनफलका भाग दे तब ईंटोंका प्रमाण (संख्या) मालूम हो जाती है और चुन- ईकी उँचाईमें ईंटकी उँचाईका भाग दे तब ईंटोंके चुनाईके तरों (रद्दों) की