लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०० ) लीलावती। अर्थः- अब १२ बारह प्रमाण चारभुजवाले खातमें अर्थात् जहां भुजका प्रमाण १२ बारह हाथ हो, ऐसे चतुर्भुजखातमें वेध नौ हाथ है, तहां तथा जिसका विस्तार दश हाथ है और जिसमें वेध (गहराई) पांच हाथ है, ऐसे गोल खातमें सूचीफल क्या होगा और दोनों क्षेत्रोंका अलग२ घनहस्तफल क्या होगा? सो मुझसे कहो॥३३॥ भुजः १२ वेधः ९ जातं यथोक्तकरणेन खातफलम्। घनहस्ताः १२९६ सूची- फलम् ४३२ १२ वेधः ९ १२ १२ समचतुर्भुजखात. १२ न्यासः- न्यासः- वृत्तखातदर्शनाय- व्यासः १० वेधः ५ अत्र सूक्ष्मपरिधिः ३९२७०/१२५० सूक्ष्मक्षेत्रफलम् ३९२७/५० वेधगुणं जातं सूक्ष्मखातफलम्- ३९२७/१० सूक्ष्मसूचीफलम् १३०९/१० यद्वा स्थूल- खातफलम् ७५० सूचीफलं स्थूलं वा ७५०/३ वेधः ५ वृत्तखातम्. व्यासः १० फैलाव- यह समचतुर्भुज खात है, इस कारण यहां भुज १२।१२ का घात किया तो हुए १४४ इसको गहराईके प्रमाण ९ से गुणा करा तो १२९६एकहजार दोसौ छियानवे हुए यह समखातफल हुआ,अब इसी क्षेत्रपर सूची आकार डाला तो क्षेत्रफल लानेके वास्ते ऊपर कही हुई रीतिके अनुसार ऊपर लाये हुए समखातफल १२९६का १२ वेध अर्थात् १२ गहराई ९ १२ १२