भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 215, कुल 268 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 215

खातव्यवहारः। (१९९) मुखजं क्षेत्रफलम् १२० तलजम् ३० तद्युतिजम् २७० एषामैक्यम् ४२० षड्भि ६ र्हतं जातं सम- फलम् ७० वेध ७ हतं ४९० जातं खातफलं घनहस्ताः ॥ फैलाव-यहां बावडीमें मुखपर लंबाई १२ हाथ है, चौडाई १० हाथ है और तलीमें लंबाई ६ हाथ है और चौडाई ५ हाथ है और वेध सात हाथ है अब यहां घनहस्तफल जाननेके लिये ऊपर कहीहुई रीतिके अनुसार मुखकी लम्बाई १२ और चौडाई १० का घात किया तो १२० हुआ, यही मुखका क्षेत्रफल है. फिर तलकी लंबाई ६ चौडाई ५ का घात किया तो ३० तलीका क्षेत्रफल हुआ, फिर मुखतलकी लम्बाईके योग १८ और मुखतलकी चौडाईके योग १५ का घात किया तो २७० हुए, यही युतिज (दोनोंके योगका) क्षेत्रफल हुआ, इन तीनों क्षेत्रफलोंका योग किया तो ४२० हुए; इसमें ६ छका भाग दिया तब ७० लब्धि हुए इसको समक्षेत्रफल कहते हैं. फिर इसको गहराई ७ से गुणा किया तब ४९० हुए, यही इस खातमें घनहस्त मान है ॥ द्वितीयोदाहरणम्- खातेऽथ तिग्मकरतुल्यचतुर्भुजे च किं स्यात्फलं नवमितः किल यत्र वेधः ॥ वृत्ते तथैव दशविस्तृतिपञ्चवेधे सूचीफलं वद तयोश्च पृथक्पृथङ्गे ॥ ३३ ॥ अन्वयः-अथ किल यत्र तिग्मकरतुल्यचतुर्भुजे खाते वेधः नवमितः । तत्र तथा एव दशविस्तृतिपंचवेधे वृत्ते खाते सूचीफलं किं स्यात् । तयोः पृथक् पृथक् च किम् फलं स्यात् इति मे वद ॥ ३३ ॥

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक) · पृष्ठ 215, कुल 268 में से · BharatKosha