लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८ ) लीलावती । अन्वयः-हरांशौ अन्योन्यहाराभिहतौ कार्यौ। एवं राश्योः समच्छेदविधानं स्यात्। यद्वा सुधिया अत्र अपवर्तिताभ्यां हराभ्यां हरांशौ मिथः गुण्यौ ॥ १ ॥ अर्थः-एक राशिके हरसे दूसरी राशिके हर और अंशको गुणा करे. फिर जिस राशिके हर और अंशको गुणा किया है उस राशिके हरसे पहिले जिस राशिके हरसे हर और अंशको गुणा किया था उस राशिके हर और अंशको गुणा करनेसे राशियोंका समच्छेद हो जाता है, अथवा राशियोंके हरोंको किसी एक अंकसे अपवर्तन देकर अपवर्तित हरोंसे परस्पर राशियोंके हर और अंशोंको बुद्धिमान् गुणा करे. तब भी समच्छेद हो जाता है, इसीको भागजाति कहते हैं ॥ १ ॥ अत्रोद्देशकः- भागजातिके विषयमें उदाहरण. रूपत्रयं पञ्चलवस्त्रिभागो योगार्थमेतान्वद तुल्य- हारान् ॥ त्रिषष्टिभागश्च चतुर्दशांशः समच्छिद्यौ मित्र वियोजनार्थम् ॥ १ ॥ अन्वयः-हे मित्र ! रूपत्रयम् पञ्चलवः त्रिभागः एतान् योगार्थं तुल्यहारान् वद । तथा त्रिषष्टिभागः चतुर्दशांशश्च एतौ वियोजनार्थं समच्छिद्यौ वद ॥ १ ॥ अर्थः- हे मित्र ! रूप ३ तनि और एक रूपका १/५ पञ्चमांश तथा एक रूपका १/३ तृतीयांश इनको योग (जोड) करनेके वास्ते सबके एक समान हर बनाकर कहो और एक रूपका १/६३ त्रिषष्टिमा भाग और एक रूपका १/१४ चौदहमा भाग इनको अन्तर (घटाव) के वास्ते दोनोंके एक समान हर बनाकर कहो ॥ न्यासः- ३/१ १/५ १/३ जाताः समच्छिदाः ४५/१५ ३/१५ ५/१५ योगे जातम् ५३/१५ फैलाव-उपरोक्त नियमानुसार ३/१ १/५ १/३ यहाँ पहली राशिके हर एकसे अन्य दोनों राशियोंके हर और अंशोंको गुणा किया तब ३/१ १/५ १/३ यह स्वरूप हुआ. फिर दूसरी राशिके हर ५ पाँचसे अन्य दोनों राशियोंके हर और अंशोंको गुणा किया तब १५/५ १/५ ५/१५ ऐसा रूप हुआ. फिर तीसरी राशिके हर ३ तीनसे अन्य दोनों राशियोंको गुणा किया ४५/१५ ३/१५ ५/१५ ऐसा रूप हुआ. अब सबके हर एक समान होनेसे समच्छेद हो गया. अब यहां हर तो सबके एकही हैं इसकारण सब अंशोंको जोडा तब ५३/१५ ऐसा हुआ ॥ CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri