भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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घनमूलकरणप्रकारः । (२९) अथ द्वितीयोदाहरणार्थं न्यासः--$\frac{१}{६३}\ \frac{१}{१४}$ सप्तापवर्तिताभ्याम् $\overline{\ \ ९\ \ \ २\ \ }$ सङ्गुणितौ समच्छेदौ $\frac{२}{१२६}\ \frac{९}{१२६}$ वियोजिते जातम् $\frac{७}{१२६} = \frac{१}{१८}$ इति भागजातिः । फैलाव-अन्तरके विषयमें उदाहरण-$\frac{१}{६३}\ \frac{१}{१४}$ यहां दोनों राशियोंके हरोंमें ७सातका अपवर्तन लग सकता है इस कारण दोनों राशियोंके हरोंमें सातका ७अपवर्तन दिया तब $\frac{१}{६३}\ \frac{१}{१४}$ ऐसा हुआ यहाँ एक राशिके अपवर्तित हरमें द्वितीय राशिके अंश तथा हरको परस्पर गुणा करनेसे समच्छेद होगा इस कारण पहली राशिके परावर्तित हर ९नौँसे द्वितीय राशिके अंश और हरको गुणा किया तब $\frac{१}{६३}\ \frac{९}{१२६}$ ऐसा हुआ फिर द्वितीय राशिके परावर्तित हर २ दो से प्रथम $\frac{१}{९}\ \frac{२}{}$ राशिके अंश तथा हरको गुणा किया तब $\frac{२}{१२६}\ \frac{९}{१२६}$ ऐसा समच्छेद हुआ अब यहाँ अन्तर करना है इस कारण अंश ९ नौंमें दो २ का घटाया तब $\frac{७}{१२६}$ ऐसा रूप हुआ. यहाँ सातका परिवर्तन लग सकता है इस कारण परिवर्तन दिया तब $\frac{१}{१८}$ ऐसा रूप हुआ ॥ अथ प्रभागजातौ करणसूत्रं वृत्तार्द्धम्-- प्रभागजाति वह कहाती है जिसमें भागका भी भाग लिया जाय उसके करनेकी रीति आधे श्लोकमें कहते हैं ॥ लवा लवघ्नाश्च हरा हरघ्ना भागप्रभागेषु सवर्णनं स्यात् ॥ अन्वयः-भागप्रभागेषु लवाः लवघ्नाः । हराः हरघ्नाः सवर्णं स्यात् ॥ अर्थः--भाग प्रभाग जातिमें अंशोंको अंशोंसे गुणा करनेसे और हरोंको हरोंसे गुण। करनेसे सवर्णन होता है ॥ अत्रोद्देशकः-- प्रभागजातिके विषयमें उदाहरण. द्रम्मार्द्धत्रिलवद्वयस्य सुमते पादत्रयं यद्भवेत् तत्पंचांशकषोडशांशचरणः सम्प्रार्थितेनार्थिने ॥ दत्तो येन वराटकाः कति कदर्येणार्पितास्तेन मे ब्रूहि त्वं यदि वेत्सि वत्स गणिते जातिं प्रभागाभिधाम् ॥ २ ॥

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