लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशेषजातिप्रकारः। (४९) अथ शेषजात्युदाहरणम्- इष्टकर्ममें शेषजाति कहते हैं । स्वार्द्धं प्रादात्प्रयागे नवलवयुगलं योऽवशेषाच्च काश्यां शेषांघ्रिः शुल्कहेतोः पथि दशमलवान्षट् च शेषाद्गयायाम् ॥ शिष्टा निष्कत्रिषष्टिर्निजगृहम नया तीर्थपान्थः प्रयात: तस्य द्रव्यप्रमाणं वद यदि भवता शेषजातिः श्रुतास्ति ॥ ४ ॥ अन्वयः- हे मित्र ! यदि भवता शेषजातिः श्रुता अस्ति तदा यः कश्चित् तीर्थ- पान्थः धनात् अर्द्धं प्रयागे प्रादात् । अवशेषात् नवलवयुगलं काश्यां प्रादात् । शेषांघ्रिः पथि शुल्कहेतोः प्रादात् । शेषात् षट् दशमलवान् च गयायां प्रादात् । तथापि निष्कत्रिषष्टिः शिष्टा । अनया निजगृहं प्रयात: । तर्हि तस्य द्रव्यप्रमाणं वद ॥ ४ ॥ अर्थः-हे मित्र ! यदि तुम इष्ट कर्म्ममें शेषजाति जानते हो तो यह बताओ कि यदि किसी तीर्थयात्रा करनेवालेने अपने धनमेंसे आधा १/२ प्रयागमें दे दिया, शेषमेंसे द्वि- गुणित नवम भाग २/९ काशीजीमें दे दिया, फिर जो शेष रहा उसमेंसे चौथा १/४ भाग मार्गमें किरायेका दे दिया, तब जो शेष रहा उसमेंसे छ ६ गुणित दशम ६/१० भाग गयाजीमें दे दिया तब भी ६३ तिरसठ निष्क बच रहे उनको खर्च करके अपने घर पहुँच गया तो कहो उस यात्रीके पास सब रुपया कितना था ? ॥ ४ ॥ न्यासः-- १/२, २/९, १/४, ६/१० दृश्यम् ६३ अत्र रूपं १ राशिं प्रकल्प्य भागान्शेषान् शेषादपास्य अथवा भागापवाहविधिना भागानयनेन सवर्णितं जातम् ७/६० अनेन दृष्टे ६३ इष्टगुणिते भक्त जातं द्रव्यप्रमाणम् ५४० इदं विलोमसूत्रेणापि सिद्धयति ॥ फैलाव-यहाँ राशि १ एक कल्पना किया उसमें इन सब भागोंको क्रमसे अर्थात् पहले १ एकमें आधा, फिर उस आधेमें द्विगुणित अपना नवम भाग घटाया फिर जो शेष रहा उसमें अपना चौथा भाग घटाया, जो शेष रहा उसमें अपना छ ६ से गुणित दशम भाग घटाया अथवा भागापवाहकी विधिसे सवर्णन किया तब ७/६० सातके नीचे साठ हर हुआ, उसका इष्टसे गुणा किये हुए ६३ में भाग लिया ४