भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ४८ ) लीलावती । अन्यदुदाहरणम्- इष्टकर्मके विषयमें और उदाहरण- हारस्तारस्तरुण्या निधुवनकलहे मौक्तिकानां विशीर्णो भूमौ यातस्त्रिभागः शयनतलगBackतः पञ्चमांशोऽस्य दृष्टः ॥ प्राप्तः षष्ठः सुकेश्या गणक दशमकः संगृहीतः प्रियेण दृष्टं षट्कं च सूत्रे कथय कतिपयैर्मौक्तिकैरेष हारः ॥ ३ ॥ अन्वयः-हे गणक ! निधुवनकलहे तरुण्याः मौक्तिकानां तारः हारः विशीर्णः । ततः त्रिभागः भूमौ यातः । अस्य पञ्चमांशः शयनतलगBackतः दृष्टः । षष्ठः सुकेश्या प्राप्तः । दशमकः प्रियेण संगृहीतः । षट्कं सूत्रे दृष्टम् । तर्हि कतिपयैः मौक्तिकैः एष हारः निर्मितः इति त्वं कथय ॥ ३ ॥ अर्थः-हे गणक ! मैथुनके झगडेमें किसी बालाका मोतियोंका हार टूट गया, उसमें मोतियोंका तीसरा भाग तौ सामने पृथवीमें गिरा और पांचवां भाग शय्याके नीचे लुढक गया ऐसा देखनेमें आया और छठा ६ भाग उसी श्यामाने बीन लिया तथा दशवां भाग पतिने बीना. और छ ६ मुक्ता सूत्रमें रह गये तो कहो कितने मोतियोंका वह हार बनाया गया था ? ॥ ३ ॥ अत्रेष्टराशिं प्रकल्प्य प्राग्वज्जातो राशिः ३० ॥ इदं क्षेपकम् ॥ फैलाव-यहाँ १/३ १/५ १/६ १/१० दृश्य ६ पूर्वोक्त नियमके अनुसार सवर्णन करने के अर्थ समच्छेद किया १/३=३/१५=३/१८=३/३०=५/१५=३/१५=१५/९०=१५/१५०=३०/९०=१८/९०=१५/९०=९/९०= ३००/९००+१८०/९००+१५०/९००+९०/९०० तब ऐसा रूप हुआ. अब सब अंशोंको जोडा तब ७२०/९०० ऐसा रूप हुआ यहां बारह १२ का अपवर्तन दिया तब ६०/७५ फिर पंद्रह १५ का अपवर्तन दिया तब ४/५ ऐसा रूप हुआ. इसे मोतियोंकी राशि एकमें घटाया तब ५/५ १/१-४/५=५-४/५ ऐसा रूप हुआ. इसका इष्ट १ एकसे गुणित दृष्ट ६ छ में भाग दिया तब ६/१ ६/१-५/१ ६/५- ३० लब्धि हुआ. यही १० हारके मोतियोंकी संख्या है. क्योंकि तीस ३० में से तीसरा भाग ६ अर्थात् दश १० तो पृथिवीमें गिरे और पांचवाँ भाग अर्थात् ६ छ ५ मोती शय्याके नीचे गिरे और छठवां भाग अर्थात् ५ पाँच मोती ३ बालाने बीने और दशवां भाग अर्थात् तीन मोती पतिने बीने और ६ छ ६ डोरेमें रह गये. सबको जोडा तब वही तीस मोती हुए ॥ ३० यह क्षेपक श्लोक है ॥