भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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दृष्टजातिप्रकारः। ( ४७ ) अपरोदाहरणम्- इष्टकर्मके ही विषयमें तीसरा उदाहरण. अमलकमलराशेर्यंशपञ्चांशषष्ठैः त्रिनयनहरिसूर्या येन तुर्येण चार्य्या ॥ गुरुपदमथ षड्भिः पूजितं शेषपद्मैः सकलकमलसंख्यां क्षिप्रमाख्याहि तस्य ॥ २ ॥ अन्वयः-हे मित्र ! येन अमलकमलराशेः त्र्यंशपंचांशषष्ठैः त्रिनयनहरिसूर्याः पूजिताः । तुर्येण च आर्य्या पूजिता । अथ षड्भिः शेषपद्मैः गुरुपदं पूजितम् । तस्य सकलकमलसंख्यां क्षिप्रम् आख्याहि ॥ २ ॥ अर्थः- हे मित्र ! जिसने सुन्दर कमलोंकी राशिमेंसे तीसरे भागसे शिवजीका, पांचवें भागसे विष्णुका और छठे भागसे सूर्यका तथा चौथे भागसे देवीका पूजन किया और बाकी किये हुए छ कमलोंसे गुरुके चरणारविंदोंका पूजन किया तब कहो कि उसके सब कमलोंकी क्या संख्या थी ? ॥ २ ॥ न्यासः-- १/३ १/५ १/६ १/४ दृश्यम् ६ । अत्रेष्टराशिं १ प्रकल्प्य प्राग्वज्जातो राशिः १२० फैलाव-यहां उपरोक्त नियमके अनुसार १/३ १/५ १/६ १/४ इन सबका सवर्णन करनेके वास्ते समच्छेद किया तब १/३ ३/१५ ३/१८ ३/१२, १/५ ३/१५, १/६ ३/१८, १/४ ३/१२, १५/६० १५/६० ३०/९० १८/९० १५/६० ९०/३६० = १२०/३६० ७२/३६० ६०/३६० ९०/३६० ऐसा हुआ. सब अंशोंका जोड दिया। तब ३४२/३६० ऐसा रूप हुआ. यहां छ ६ का परिवर्तन दिया तब ५७/६० ऐसा रूप हुआ. इसको राशि कमलोंकी १ एकमें घटाया तब ५७/६० १/१ = ५७/६० ६०/६० = ३/६० तीनके नीचे ६० साठ हर शेष हुआ इसमें तीनका परिवर्तन दिया तब १/२० ऐसा रूप हुआ. इसका इष्टराशि १ से गुणित दृश्य ६ में भाग दिया तब १/० : ६/१ = २०/१ : ६/१ ऐसा रूप हुआ. अंशोंको परस्पर गुणा किया तब १२० लब्धि हुआ. यही कमलों की वह राशि है, कि जिसमेंसे सर्वत्र पूजन कियाथा क्यों कि राशिका | तीसरा भाग अर्थात् ४० चालीस कमल शिवजीको चढाये और | ४० पांचवें भाग अर्थात् २४ चौबीस कमलोंसे विष्णुभगवानका पूजन | २४ किया और छठे भाग अर्थात् २० बीस कमलोंसे सूर्यका पूजन किया | २० और चौथा भाग अर्थात् ३० तीस कमलोंसे दुर्गाका पूजन किया. | ३० बाकी छ ६ कमलोंसे गुरुजीका पूजन किया तब सबको जोडा तब | ६ वही १२० राशि हुआ ॥ | ------- | १२०