लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४६ ) लीलावती । अर्थ:-हे मित्र ! हाथियोंका एक समूह था. उसमेंसे अपने तृतीयांशसहित आधा | १/२ / ३ | तो वनकी गुफामें जाता हुआ हमने देखा और सात ७ वें भाग करके सहित | १/६ / ७ | छठा भागभी | १/६ / ७ | नदीमें जल पीता था और अपने नवम भाग करके सहित आठवां भाग | १/८ / ९ | भी कमलोंसेभर हुए तालावमें जल पीता था और ३ तीन हाथिनियोंके साथ १ एक गजराज बडे आनन्दसे क्रीडा करता था तो कहो सब हाथियोंकी क्या संख्या हुई ? ॥ १ ॥ न्यास:- १/२ ६ ६ दृश्यम् ४ — — — एषां सवर्णनं द्वाभ्यामपवर्तितम् - २१ ५/३६ पुनरेषां सवर्णनं नवभिरपवर्तितम् २५१/२५२ इदमिष्टराशेः शोधितम् १/२५२ अनेन दृष्टे ४ इष्टगुणिते भक्ते जाता हस्तिसंख्या १००८ फैलाव-उपरोक्त रीतिके अनुसार | १/२ / ३ | | १/६ / ७ | | १/८ / ९ | इन सब राशियोंको भागानुबन्धकी रीतिसे सवर्णन किया तब १/२ ४/३ १/६ ८/७ १/८ १०/९ ऐसा रूप हुआ. यहां दो २ का अपवर्तन दिया तब २/३ ४/२१ ५/३६ ऐसा रूप हुआ. इसको समच्छेद २/३ ४/२१ ५/३६ = ५२/६३ ५२/६३ २२६८ = १५१२/२२६८ ४३२/२२६८ ३१५/२२६८ करके जोडा तब २२५९/२२६८ ऐसा रूप हुआ. फिर ९ नौका परिवर्तन दिया तब २५१/२५२ ऐसा रूप हुआ. अब यूथसंख्या एकमें घटाया तब २५१/२५२ १/१ = २५१/२५२ २५२/२५२ = १/२५२ ऐसा रूप हुआ तब इष्ट १ एकसे गुणित दृश्य ४ चारमें इसका भाग लिया तब २५२ ४/१ = २५२ ४/१ = १००८ एक हजार आठ हुआ. यही हस्तियोंके यूथकी संख्या है. क्योंकि अपने तृतीयांश सहित आधा ६७२ अर्थात् | ६७२ | छःसौ बहत्तर तो वनकी गुफामें और सप्तम भाग सहित छठा | १९२ | भाग अर्थात् १९२ एकसौ बानवे नदीमें जल पीता था और नवम | १४० | भाग सहित आठवां भाग १४० अर्थात् एकसौ चालीस कमलोंके | ४ | | १००८ | तालाबमें जल पीता था और तीन हस्तिनियोंके सङ्ग एक हस्ती, अर्थात् चार ४ क्रीडा करते थे. सबको जोडा तब वही एक हजार आठ १००८ हुए ॥ यह क्षेपक श्लोक है.