भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ६२ ) लीलावती । उदाहरणम्- और उदाहरण- यातं हंसकुलस्य मूलदशकं मेघागमे मानसं प्रोड्डीय स्थलपद्मिनी वनमगादष्टांशकोऽम्भस्तटात्॥बाले बालमृ- णालशालिनि जले केलिक्रियालालसं दृष्टं हंसयुगत्रयं च सकलां यूथस्य संख्यां वद ॥ ३ ॥ अन्वयः-हे बाले ! मेघागमे हंसकुलस्य मूलदशकं मानसं यातम् । अष्टांशकः अम्भस्तटात् उड्डीय स्थलपद्मिनीवनम् अगात् । हंसयुगत्रयं च बालमृणालशालिनि जले केलिक्रियालालसं दृष्टम् । तर्हि यूथस्य सकलां संख्यां वद ॥ ३ ॥ अर्थः-हे सोलह वर्षकी उमरवाली प्रिये ! एक हंसोंका समूह था. उसमेंसे वर्षा- काल आनेपर मूलदशगुणा मानसरोवरको चला गया और अष्टमांश जलके किनारैसे उडकर स्थलपद्मिनी-वनमें चला गया और हंसोंके तीन ३ जोडे कोमल मृणालसे शोभायमान जलमें अत्यन्त प्रीतिपूर्वक क्रीडा करते देखे तो कहो उस समूहमें कितने हंस थे ? ॥ ३ ॥ न्यासः-मूलगुणम् १० अष्टांशः १/८ दृश्यम् ६ यदा लवै- श्चोनयुत इत्युक्तत्वादत्रैकेन भागोनेन ७/८ दृश्यमूल- गुणौ भक्त्वा जातं दृश्यम् ४८/७ मूलगुणम् ८०/७ गुणार्द्ध ४०/७ मस्य कृत्या १६००/४९ युक्तम् २९३६/४९ अस्य मूलम् ५४/७ गुणार्द्धेन ४०/७ युतं वर्गीकृतं जातो हंसराशिः-१४४ ॥ फैलाव-द्वितीयश्लोकोक्त ऊपरके नियमानुसार एकमें आठवें ८ भाग १/८ को घटाया तब १/१ - १/८ = १-१/८ = ७/८ ऐसा हुआ. इसका दृश्य ६ छह में भाग लिया तब ७/८ : ६/१ = ६/७ : ६/१ = ६ x ४१/७ = ३३६/४९ ऐसा होनेपर ७ सातका परि- वर्तन दिया तब ४८/७ यह दृश्य राशि हुआ. इसी प्रकार ७/८ का मूलगुण १० में भाग दिया तब ७/८ : १०/१ = ६/७ = १०/१ x ७/७ = ५६०/४९ ऐसा होनेपर सातका परिवर्तन देनेसे ८०/७ ऐसा मूलराशि हुआ. अब दृश्य ४८/७ राशि इसको मानकर मूलगुण ८०/७ को मानकर ऊपरके श्लोकमें कही हुई रीति के अनुसार क्रिया करी. अर्थात् मूल गुणका आधा १०/७ x १/२ यह हुआ. इसमें २ दोका परिवर्तन दिया तब ऐसा हुआ ४०/७ इसका वर्ग किया तब १६००/४९ ऐसा हुआ. इसको दृश्य राशि ४८/७ में

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