लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८० ) लीलावती। ८ १२ १२ १६ ――― ――― ९६ १९२ १० १४ ――― ――― ९६० २६८८ १४ ३० ――― ――― १३४४० ८०६४० १२ २ ――― ――― १६१२८० १६१२८० ८ १२९०२४० बहुत राशियोंके घातमें १२९०२४० थोडी राशियोंके घात १६१२८० का भाग दिया तब ८ आठ द्रम्म लब्धि हुए, यही भाडा होगा. अथ भाण्डप्रतिभाण्डे करणसूत्रं वृत्तार्द्धम्-- अब भाण्डप्रतिभाण्ड (एक वस्तु देकर उतने ही मूल्यकी दूसरी वस्तु पलटना) की रीति आधे श्लोकमें कहते हैं- तथैव भाण्डप्रतिभाण्डके विधिर्विपर्य्ययस्तत्र सदा हि मूल्ये ॥ अन्वयः-भाण्डप्रतिभाण्डके तथा एव विधिः कार्य्यः । तत्र हि मूल्ये सदा विपर्य्ययो भवति ॥ अर्थः-भाण्डप्रतिभाण्डमें वैसा ही (पञ्चराशिककी तरह ) विधि करना तहां ही मूल सदा पलट कर रखना. उदाहरणम्-- द्रम्मेण लभ्यत इहाम्रशतत्रयञ्चेत्रिंशत्पणेन विपणौ वरदा- डिमानि ॥ आम्रैर्वदाशु दशभिः कति दाडिमानि लभ्यानि तद्विनिमयेन भवन्ति मित्र ॥ १ ॥ अन्वयः-हे मित्र ! चेत् इह विपणौ द्रम्मेण आम्रशतत्रयं लभ्यते। तथा पणेन त्रिंशत् दाडिमानि लभ्यन्ते तर्हि दशभिः आम्रैः तद्विनिमयेन कति दाडिमानि लभ्यानि भवन्ति इति आशु वद ? ॥१॥ हे मित्र ! यदि इस दुकानपर एक द्रम्मके ३०० तीनसौ आम मिलते हैं और एक पणमें ३० तीस दाडिमी मिलती हैं, तो दश १० आमोंसे बदला करनेसे कितनी दाडिमी मिलेंगी ? यह शीघ्र कहो ॥ १॥ CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri