भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( १०२ ) माधवनिदान । ऊपरका श्वास कुपित होनेसे नीचेका बन्द होय अर्थात् हृदयमें रुकजाय अथवा श्वास कहिये वायु सो नीचे नहीं उतरे तब मनुष्यको मोह हो, ग्लानि हो ऐसे पुरु- षके ऊर्ध्वश्वास प्राणको हरण करे ॥ छिन्नश्वासके लक्षण । यस्तु श्वसिति विच्छिन्नं सर्वप्राणेन पीडितः । न वा श्वसिति दुःखार्त्तो मर्मच्छेदैरुगर्दितः ॥ १० ॥ आनाहस्वेदमूर्च्छार्त्तो दह्यमानेन बस्तिना । विप्लुताक्षः परिक्षीणः श्वसन्नैकलोचनः ॥ ११ ॥ विचेताः परिशुष्कास्यो विवर्णः प्रलपन्नरः । छिन्नश्वासेन विच्छिन्नः स शीघ्रं विजहात्यसून् ॥ १२ ॥ जो पुरुष ठहर ठहरकर जितनी शक्ति हो उतनी शक्तिसे श्वास त्याग करे अथवा क्लेशको प्राप्त हो श्वासको नहीं छोडे और मर्म कहिये हृदय बस्ति ( मूत्र- स्थान ) और नाडियोंको मानो कोई छेदन करे ऐसी पीडा हो, पेटका फूलना, पसीना और मूर्च्छा इनसे पीडित हो, वस्ति ( मूत्रस्थान ) में जलन हो, नेत्र चला- यमान हों, अथवा नेत्र आंसुओंसे भरे हों, श्वास लेते २ थक जाय तथा श्वास लेते २ एक नेत्र लाल हो जाय ( यह व्याधिके प्रभावसे होय है दोषके प्रभावसे होय तो दोनों होजायँ ), उद्विग्नचित्त होजाय, मुख सूखे, देहका वर्ण पलट जाय, बकवाद करे, संधिके सब बन्ध शिथिल होजायँ, इस छिन्नश्वास करके मनुष्य शीघ्र प्राणका त्याग करे ॥ तमकश्वासके लक्षण । प्रतिलोमं यदा वायुः स्रोतांसि प्रतिपद्यते । ग्रीवां शिरश्च संगृह्य श्लेष्माणं समुदीर्य च ॥ १३ ॥ करोति पीनसं तेन रुद्धो घुर्घुरकं तथा । अतीव तीव्रवेगेन श्वासं प्राणप्रपीडकम् ॥ १४ ॥ प्रताम्यति स वेगेन त्रस्यते संनिरुद्ध्यते । प्रमोहं कासमानश्च स गच्छति मुहुर्मुहुः ॥ १५ ॥ श्लेष्मणा मुच्यमा- नेन भृशं भवति दुःखितः । तस्यैव च विमोक्षान्ते मुहूर्त्तं लभते सुखम् ॥ १६ ॥ तथाऽस्योध्वंसते कण्ठः कृच्छ्रा- च्छक्नोति भाषितुम् । न चापि निद्रां लभते शयानः श्वास- पीडितः ॥ १७ ॥ पार्श्वे तस्यावगृह्णाति शयानस्य समीरणः । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA