माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 122, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( १०४ ) माधवनिदान । क्षुद्रश्वासके लक्षण और साध्यासाध्य । रूक्षायासोद्भवः कोष्ठे क्षुद्रो वातमुदीरयेत् । क्षुद्रश्वासो न सोऽत्यर्थं दुःखैनाङ्ग-प्रबाधकः ॥ २३ ॥ हिनस्ति न स गात्राणि न च दुःखी यथेतरे । न च भोजनपानानां निरुणद्ध्युचितां गतिम् ॥ २४ ॥ नेन्द्रियाणां व्यथां चापि काञ्चिदापादयेद्रुजम् । स साध्य उक्तो बलिनः सर्वे चाव्यक्तलक्षणाः ॥ २५ ॥ क्षुद्रः साध्यतमस्तेषां तमकः क्षुद्र उच्यते । त्रयः श्वासा न सिध्यन्ति तमको दुर्बलस्य च ॥ २६ ॥ रूखा पदार्थ खानेसे, श्रमके करनेसे प्रगट भई जो क्षुद्र श्वास सो पवनको ऊपर ले जाय, यह क्षुद्रश्वास अत्यन्त दुःखदायक नहीं है तथा अंगोंको कुछ विकार नहीं करे। जैसे ऊर्ध्वश्वासादिक दुःखदायक हैं ऐसे यह नहीं है और भोजनपानादिकोंकी उचित गतिको बन्द नहीं प्रगट करे और इन्द्रियोंको पीडा नहीं करे और कोई रोगको भी नहीं प्रगट करे । यह क्षुद्रश्वास साध्य कहा है । बलवान् पुरुषके सब महाश्वासादिकोंके लक्षण प्रगट न होयँ तो साध्य हैं, तिनमें भी क्षुद्रश्वास अत्यन्त साध्य है और तमकको क्षुद्र कहते हैं । अथवा-“ तमकः क्षुद्र उच्यते ” इस जगह “ तमकः कृच्छ्र उच्यते ” ऐसा भी पाठ कोई कहते हैं । उसका अर्थ यह है कि, तमक कृच्छ्रसाध्य है, महान्, ऊर्ध्व और छिन्न ये तीन श्वास सम्पूर्ण लक्षणयुक्त साध्य नहीं और निर्बल पुरुषके तमकश्वास भी साध्य नहीं होय ॥ कामं प्राणहरा रोगा बहवो न तु ते तथा । यथा श्वासश्च हिक्का च हरतः प्राणमाशु वै ॥ २७ ॥ प्राणहरण करनेवाले ऐसे सन्निपात ज्वरादिक रोग बहुतसे हैं सो ठीक है । परन्तु श्वास और हिचकी ये जैसे जल्दी प्राण हरण करते हैं ऐसे और ज्वरादिक नहीं करे॥ इति श्रीपंडितदत्ताराममाथुरप्रणीतमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषाटीकायां श्वासनिदानं समाप्तम् ॥