भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (१०५) अथ स्वरभेदनिदानम् । अत्युच्चभाषणविषाध्ययनाभिघातसंदूषणैः प्रकुपिताः पवना- दयस्तु । स्रोतःसु ते स्वरवहेषु गताः प्रतिष्ठां हन्युः स्वरं भवति चापि हि षड्विधः सः ॥ वातादिभिः पृथक् सर्वैर्मेदसा च क्षयेण च ॥ १ ॥ बहुत जोरसे बोलनेसे, विषके खानेसे, ऊंचे स्वरसे पाठ करनेसे अर्थात् वेदादि पाठ करनेसे कण्ठमें लकडी काष्ठ आदिकी चोट लगनेसे कोपको प्राप्त हुए जो वात, कफ, पित्त सो कण्ठमें स्वरके बहनेवाली चार नसें हैं उनमें प्राप्त हो अथवा उनमें वृद्धिको प्राप्त स्वरको नाश करे । यह स्वरभेद वात, पित्त, कफ, सन्निपात, क्षय और मेद इन भेदोंसे छः प्रकारका है ॥ वातस्वरभेदके लक्षण । वातेन कृष्णनयनाननमूत्रवर्चा भिन्नं स्वरं वदति गर्दभवत्स्वरं च । वायुसे स्वरभंग होय तो रोगीके नेत्र, मुख, मूत्र और विष्ठा यह काले होयँ वह पुरुष टूटाहुआ शब्द बोले अथवा गधेके स्वरप्रमाण कर्कश बोले ॥ पित्तज स्वरभेदके लक्षण । पित्तेन पीतनयनाननमूत्रवर्चा ब्रूयाद्गलेन स च दाहसमन्वितेन ॥ २॥ पित्तस्वरभेदवाले मनुष्यके नेत्र, मुख, मूत्र और विष्ठा ये पीले होते हैं और बोलते समय गलेमें दाह होता है ॥ कफके स्वरभेदके लक्षण । ब्रूयात्कफेनससतंकफरुद्धकण्ठः स्वल्पंशनैर्वदतिचापि दिवाविशेषात्। कफके स्वरभेदमें, कण्ठ कफसे रुका रहे और मन्द मन्द तथा थोडा बोले दिनमें बहुत बोले ॥ सन्निपातके स्वरभेदका लक्षण । सर्वात्मके भवति सर्वविकारसंपत्तं चाप्यसाध्यमृषयः स्वरभेदंमाहुः ३ सन्निपातके स्वरभेदमें तीनों दोषोंके लक्षण होते हैं यह स्वरभेद असाध्य है ऐसे ऋषि लोग कहते हैं ॥ १ यदुक्तं सुश्रुते-द्वाभ्यां भाषते द्वाभ्यां घोषं करोति, भाषणघोषणयोरल्पमहत्त्वाभ्यां भेदः ।