भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 404 में से

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पृष्ठ 126

१०८ ) माधवनिदान । अथ छर्द्दिनिदानम् । छर्दिके कारण और निरुक्ति । दुष्टैर्दोषैःपृथक्सर्वैर्बीभत्सालोकनादिभिः। छर्दयःपञ्च विज्ञेया- स्तासां लक्षणमुच्यते ॥ १ ॥ अतिद्रवैरतिस्निग्धैरहृद्यैर्लवणै- रपि । अकाले चातिमात्रैश्च तथाऽसात्म्यैश्च भोजनैः ॥ २ ॥ श्रमाद्भयात्तथोद्वेगादजीर्णात्कृमिदोषतः । नार्याश्चापन्नसत्त्वाया स्तथातिद्रुतमश्नतः॥३॥ बीभत्सैर्हेतुभिश्चान्यैर्द्रुतमुत्क्लेशितो बलात् । छादयन्नाननं वेगैरर्दयन्नङ्गभञ्जनैः ॥ निरुच्यते छर्दिरिति दोषो वक्त्रं प्रधावति ॥ ४ ॥ दुष्ट हुए पृथक् और सब दोषों करके तथा दुष्ट वस्तुके देखनेसे आदिशब्द करके दुष्ट गन्धके सूंघनेसे पांच प्रकारकी छर्दि जाननी अर्थात् जिसको रद्द वमन उलटी कहते हैं उसके लक्षण आगे कहते हैं । अत्यन्त पतले अथवा चिकने अहृद्य ( अप्रिय ) वस्तु, खारके पदार्थ इनके सेवन करनेने, कुसमय भोजन करनेसे अथवा अत्यन्त भोजन करनेसे अथवा जो न पचे ऐसे भोजन करनेसे, श्रम, भय, उद्वेग, अजीर्ण, कृमिदोष इन कारणोंसे, गर्भिणी स्त्रीके गर्भकी पीडासे तथा जल्दी२ भोजन करनेसे और बीभत्स ( खोटे ) कारणोंसे जैसे विष्ठा, राध आदिका देखना इनसे तीनों दोष कुपित हो बलसे मुखको आच्छादन करें और अंगोंको पीडा कर मुखद्वारा भोजन किया हुआ सब निकाल देयँ इसको ( छर्दि ) उलटी ऐसे मनुष्य कहते हैं । इस जगह उदानवायु वमन कराती है ॥ छर्दिके पूर्वरूप । हृल्लासोद्गारसंरोधौ प्रसेको लवणास्यता । द्वेषोऽन्नपाने च भृशं वमीनां पूर्वरक्षणम् ॥ ५ ॥ हृदयमें खारा, खट्टा प्रथमही निकले अथवा सूखी रद्द होय, डकार आवे नहीं, लार गिरे, खारी मुख हो जाय, अन्न और पानीसे अत्यन्त अरुचि होय ये छर्दी ( छाट ) के पूर्वरूप हैं ॥ वातकी छर्दिके लक्षण । हृत्पार्श्वपीडा मुखशोषशीर्षनाभ्यर्त्तिकासस्वरभेदतोदैः । १ छादयति मुखम् अर्दयति चाङ्गानि इति छर्दिः ।