माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 127, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १०९ ) उद्गारशब्दं प्रबलं सफेनं विच्छिन्नकृष्णं तनुकं कषायम् । कृच्छ्रेण चाल्पं महता च वेगेनातॉऽनिलाच्छर्दयतीह दुःखम्॥६॥ हृदय और पसवाडा इनमें पीडा होय, मुखशोष मस्तक और नाभि इनमें शूल होय, खांसी, स्वरभेद, सूई चुभनेकीसी पीडा हो, डकारका शब्द प्रबल होय, वमनमें झाग आवे, ठहर ठहरकर वमन होय तथा थोडी होय, वमनका रंग काला होय, पतली और कसैली होय, वमनका वेग बहुत होय परन्तु वमन थोडा होय और वेगके प्रभावसे दुःख बहुत होय ये लक्षण वायुकी छर्दिके हैं ॥ पित्तकी छर्दिके लक्षण । मूर्च्छा पिपासा मुखशोषशीर्षताल्वाक्षिसन्तापतमोभ्रमार्तः । पीतं भृशोष्णं हरितं सतिक्तं धूम्रं च पित्तेन वमेत्सदाहम् ॥७॥ मूर्च्छा, प्यास, मुखशोष, मस्तक, तलुआ, नेत्र इनमें सन्ताप अर्थात् तपायमान रहे, अन्धेरा आवे, चक्कर आवे, रोगी पीला गरम हरा कडुआ धूओंके रंगका और दाह युक्त ऐसे पित्तको वमन करे, यह पित्तकी छर्दिका लक्षण है ॥ कफकी छर्दिके लक्षण । तन्द्रास्यमाधुर्यकफप्रसेकं सन्तोषनिद्रारुचिगौरवार्त्तः । स्निग्धं घनं स्वादु कफाद्विशुद्धं सरोमहर्षोऽल्परुजं वमेत्तु ॥ ८ ॥ तन्द्रा, मुखमें मिठास, कफका पडना, सन्तोष (खाये बिनाही तृप्ति), निद्रा, अरुचि, भारीपना इनसे पीडित हो, चिकना, गाढा, मीठा, सफेद ऐसे कफको वमन करे । जब रद् करे तब पीडा थोडी होय, रोमांच हो ये कफकी छर्दिके लक्षण हैं ॥ त्रिदोषकी छर्दिके लक्षण । शूलाविपाकारुचिदाहतृष्णाश्वासप्रमोहप्रबला प्रसक्तम् । छर्दिस्त्रिदोषाल्लवणाम्लनीलसांद्रोष्णरक्तं वमतां नृणां स्यात् ॥९॥ शूल, अजीर्ण, अरुचि, दाह, प्यास, श्वास, मोह इन लक्षणोंसे प्रबल भई जो वमन सो सन्निपातसे होती है । रद् करनेवालेकी वमन खारी, खट्टी, नीली, संघट्ट (जिसको देशवारी मनुष्य जाडी कहे हैं ) गरम लाल ऐसी होय है ॥ असाध्य छर्दिके लक्षण । विट्सवेदमूत्राम्बुवहानि वायुः स्रोतांसि संरुद्ध्य यदोर्ध्वमेति । उत्सन्नदोषस्य समाचितं तं दोषं समुद्धूय नरस्य कोष्ठात् ॥१०॥ १ यदुक्तं सुश्रुते—शुक्लं हिमं सान्द्रकफं कफेन । इति । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA