माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १११ ) खांसी, श्वास, ज्वर, हिचकी, प्यास, बेचेतपना, हृदयरोग, अँधेरा आना ये छर्द्दिरोगके उपद्रव हैं ॥ मधुकोशं सुनिर्मथ्य सारमाकृष्य वै मया । व्रजभाषाकृता टीका माधवार्थप्रकाशिका ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां छर्द्दिनिदानं समाप्तम् ।
अथ तृष्णानिदानम् । तृष्णाकी सम्प्राप्ति । भयश्रमाभ्यां बलसंक्षयाद्वाप्यूर्ध्वं चितं पित्तविवर्धनैश्च । पित्तं सवातं कुपितं नराणां तालु प्रपन्नं जनयेत्पिपासाम् ॥ १ ॥ भयसे, श्रमसे, बलके क्षयसे और पित्तके बढानेवाले क्रोध उपवासादिकोंसे अपने स्थानमें संचित हुआ जो पित्त और वात ये कुपित होकर ऊपर तालुए (पिपासा- स्थान) में जाय तृष्णा (प्यास) को उत्पन्न करें। इस जगह तालुका तो उपल- क्षणमात्र है तालुके कहनेसे क्लोमस्थान (हृदयमें जो प्यासका स्थान है) उसका भी ग्रहण है, क्योंकि वह भी प्यासका स्थान है, सो चरकमें लिखा है ॥ अन्नजादि तृष्णाकी सम्प्राप्ति । स्रोतःस्वपां वाहिषु दूषितेषु दोषैश्च तृष्णा भवतीह जन्तोः । तिस्रः स्मृतास्ताः क्षतजा चतुर्थी क्षयात्तथा ह्यामसमुद्भवा च॥२ भक्तोद्भवा सप्तमिकेति तासां निबोध लिंगान्यनुपूर्वशश्च ॥ जलके बहनेवाली नसके दूषित होनेसे दोष (अन्न कफ और आम) इनसे तृष्णा रोग होय हैं सो तीन हैं और चौथी (क्षतजतृष्णा जो व्रणवाले पुरुषके होती है) पांचवी क्षयसे होती है छठी आमसे होती है, सातवी अन्नसे होय है। उन्होंके लक्षण
१ रसवाहिनी च धमनी जिह्वामूलगळतालुक्लोम्नः । संशोष्य नृणां देहे कुरुते तृष्णामतिप्रबलाम् ॥