भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 404 में से

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( १३८ ) माधवनिदान । वातके अपस्मारमें रोगी कांपे, दांतोंको चबावे, मुखसे झाग गेरे और श्वास भरे तथा कर्कश अरुणवर्ण और काला वर्ण मनुष्योंको दीखे अर्थात् कोई नील वर्णका मनुष्य मेरे पास दौडा आता है । इसी प्रकार पित्तसे पीले वर्णका पुरुष दौडा आता है और कफमें सफेद रंगका पुरुष सामने दौडा आता है ऐसे जानना ॥ पित्तकी मृगीके लक्षण । पीतफेनाङ्गवक्त्राक्षः पीतासृग्रूपदर्शनः । सतृष्णोष्णानलव्याप्तलोकदर्शी च पैत्तिकः ॥ ४ ॥ पित्तकी मिरगीवालोंके झाग, देह, मुख और नेत्र ये पीले होते हैं और वह पीले रुधिरके रंगकीसी सब वस्तु देखे, प्यासयुक्त और गरमीकी साथ अग्निसे व्याप्त भया ऐसा सब जगत्को देखे ॥ कफकी मृगीके लक्षण । शुक्लफेनाङ्गवक्त्राक्षः शीतहृष्टाङ्गजो गुरुः । पश्यञ्छुक्लानि रूपाणि मुच्यते श्लैष्मिकश्चिरात् ॥ ५ ॥ कफकी मिरगीवालेके झाग, अंग, मुख और नेत्र सफेद होयं, देह शीतल होय तथा देंहके रोमांच खडे रहे, भारी होय और सब पदार्थ सफेद दीखे यह अप- स्मार ( मिरगी ) रोग देरमें छोडे । इससे यह सूचना करी कि, वातपित्तकी मृगी जलदी रोगीको छोड देती है ॥ सन्निपातकी मृगीके लक्षण । सर्वैरेतैः समस्तैश्च लिंगैर्ज्ञेयस्त्रिदोषजः । अपस्मारः स चासाध्यो यः क्षीणस्यानवश्च यः ॥ ६ ॥ जिसमें तीनों दोषोंके लक्षण मिलते हों वह त्रिदोषज अपस्मार जानना । यह असाध्य है । और जो क्षीण पुरुषके होय वह भी असाध्य है । तथा पुराना पड गया होय वह भी अपस्मार ( मिरगी ) रोग असाध्य है ॥ मृगीके असाध्य लक्षण । प्रतिस्फुरन्तं बहुशः क्षीणं प्रचलितभ्रुवम् । नेत्राभ्यां च विकुर्वाणमपस्मारो विनाशयेत् ॥ ७ ॥ बारंबार कंपयुक्त होय, क्षीण हो गया हो भृकुटी ( भौंह ) का चलानेवाला और नेत्र बांके करमेवाला ऐसा अपस्मारी रोगी जीवे नहीं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

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