माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 165, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १४७ ) कृत्स्नोऽर्द्धकायस्तस्य स्यादकर्मण्यो विचेतनः । एकाङ्गरोगं तं केचिदन्ये पक्षवधं विदुः ॥ ४० ॥ वायु आधे शरीरको पकड सब शरीरकी नसोंको सुखायकर दहने या बांये अंगके बाहु कक्षा पार्श्वादिकोंमेंसे किसी एकको नाश करदे और सन्धिके बंधनोंको शिथिल करदे, पीछे उस रोगीके सब वा आधे अंग हलें चलें नहीं और उसको थोडा भी देखनेका स्पर्श आदिका ज्ञान नहीं रहे इसको एकांगरोग कहते हैं, दूसरे पक्षवध कहते हैं । इसीको पक्षाघात कहते हैं । लोकमें लकवा कहते हैं ॥ सर्वाङ्गरोगके लक्षण । सर्वाङ्गरोगस्तद्वत्स्यात्सर्वकायाश्रितेऽनिले । तद्वत् कहिये “ शिरास्नायु ” इत्यादि सम्प्राप्ति लक्षण इससे जानने । सर्व शिराओं ( नाडियों ) में वायु प्राप्त होनेसे उसको सर्वांगरोग कोई कहते हैं ॥ अब साध्यासाध्यके ज्ञानार्थ और दोषोंका सम्बन्ध कहते हैं- दाहसंतापमूर्च्छाः स्युर्वायौ पित्तसमन्विते । शैत्यशोथगुरु- त्वानि तस्मिन्नेव कफान्विते ॥ ४१ ॥ शुद्धवातहतं पक्षं कृच्छ्रसाध्यतमं विदुः । साध्यमन्येन संसृष्टमसाध्यं क्षयहेतु- कम् ॥ ४२ ॥ गर्भिणीसूतिकाबालवृद्धक्षीणेष्वासृक्स्रुतौ । पक्षाघातं परिहरेद्वेदनारहितो यदि ॥ ४३ ॥ पक्षबंधकी वायु कफपित्तयुक्त होवे तो दाह, सन्ताप और मूर्च्छा होय और वही वायु कफयुक्त होय तो शीत सूजन भारीपन ये लक्षण होयें और केवल वायुसे प्रगट पक्षाघात अत्यन्त कष्टसाध्य होता है और दोषोंसे ( पित्तसे या कफसे ) संसृष्ट होनेसे साध्य होता है। क्षयसे प्रगट भया पक्षाघात असाध्य होता है। गर्भिणी, प्रसूति, बालक, वृद्ध और क्षीण इनके भया तथा रुधिरके स्रावसे प्रगट भया पक्षाघात पीडा- रहित हो तो उसको वैद्य त्यागदे अर्थात् असाध्य जान चिकित्सा न करे ॥ अर्दितरोगके लक्षण । उच्चैर्व्याहरतोऽत्यर्थं खादतः कठिनानि च । हसतो जृम्भतो वापि भाराद्विषमशायिनः ॥ ४४ ॥ शिरोनासाौष्ठचिबुक- ललाटेक्षणसन्धिगः । अर्दयत्यनिलो वक्त्रमर्द्दितं जनयत्यतः ॥ ४५ ॥ वक्रीभवति वक्त्रार्धं ग्रीवा चाप्यपवर्तते । शिर- श्चलति वाक्स्तंभो नेत्रादीनां च वैकृतम् ॥ ४६ ॥ ग्रीवा-