भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( १६२ ) माधवनिदान । कुपित होकर त्रिकसंधियोंमें जायके प्रवेश करे तब देह जकडीसी हो जाय, इस रोगको आमवात कहते हैं ॥ आमवातके सामान्य लक्षण । अङ्गमर्दोऽरुचिस्तृष्णा आलस्यं गौरवं ज्वरः । अपाकः शूनताऽङ्गानामामवातः स उच्यते ॥ ६ ॥ अंगोंका टूटना, अरुचि, प्यास, आलस्य, भारीपना, ज्वर, अन्नका न पचना और देहमें सूजनसी हो जाय, इस रोगको आमवात कहते हैं ॥ जब आमवात अत्यन्त बढ़गया होय उसके लक्षण कहते हैं- स कष्टः सर्वरोगाणां यदा प्रकुपितो भवेत् । हस्तपादशिरो- गुल्फत्रिकजानूरुसन्धिषु ॥ ७ ॥ करोति सरुजं शोथं यत्र दोषः प्रपद्यते । स देशो रुजतेऽत्यर्थं व्याविद्ध इव वृश्चिकैः ॥ ८ ॥ जनयेत्सोऽग्निदौर्बल्यं प्रसेकारुचिगौरवम् । उत्साह- हानिं वैरस्यं दाहं च बहुमूत्रताम् ॥ ९॥ कुक्षौ कठिनतां शूलं तथा निद्राविपर्ययम् । तृट्छर्दिभ्रममूर्च्छाश्च हृद्ग्रहं विड्बिबन्धताम् ॥ १० ॥ जाड्यान्त्रकूजमानाहं कष्टांश्चा- न्यानुपद्रवान् ॥ ११ ॥ यह आमवात जिस समय बढ़े उस समय रोगोंमें कष्टकर्त्ता होता है अर्थात् सब रोगोंसे बढ़कर कष्टदायक है । हाथ, पैर, मस्तक, घोंटू, त्रिकस्थान, जानु, जंघा इनकी सन्धियोंमें पीडायुक्त सूजन करे और जिस ठिकाने आम जाय उसी ठिकाने बीछूके डंक मारनेकीसी पीडा करे, यह रोग मंदाग्नि, मुखसे पानीका गिरना, अरुचि, देह भारी, उत्साहका नाश, मुखमें विरसता, दाह, बहुत मूत्रके उतरना, कूखमें कठिनता, शूल, दिनमें निद्रा आवे, रातिमें जाग, प्यास, वमन, भ्रम, मूर्च्छा, हृदयमें दुःख, मलका अवरोध, जड़ता ( काम करनेकी शक्तिसे रहित ) आंतोंका गूंजना, अफरा तथा अत्यन्त उपद्रव कहिये वातव्याधिमें कहे कलायखंजादिकोंको करे ॥ १ अविपक्वरसं पक्वं दुर्गन्धं बहुपिच्छिलम् । सदनं सर्वगात्राणामाम इत्यभिधीयते ॥ आम- मन्नरसं केचित्केचित्तं मलसञ्चयम् । प्रथमां दोषदुष्टिं वा केचिदामं प्रचक्षते ॥ आहारस्य रसः शेषो यो न पक्वोऽभिलाघवात् । स मूढं सर्वरोगाणामित्यभिधीयते ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA